Wednesday, April 1, 2026
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वैश्विक संकटों पर भारत की सक्रिय कूटनीति, आंवला सांसद नीरज मौर्य ने संसद में उठाया सवाल

वैश्विक संकटों पर भारत की सक्रिय कूटनीति, आंवला सांसद नीरज मौर्य ने संसद में उठाया सवाल

रिपोर्ट सत्य प्रकाश 

बरेली/नई दिल्ली।

वैश्विक स्तर पर जारी संघर्षों और मानवीय संकटों के बीच भारत की भूमिका को लेकर आंवला से सांसद नीरज मौर्य ने संसद में महत्वपूर्ण सवाल उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त करने में भारत की क्या भूमिका है, मानवीय संकट को कम करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में सरकार की रणनीति क्या होगी।

सांसद नीरज मौर्य के सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि भारत ने वैश्विक तनाव को कम करने और शांति स्थापित करने के लिए लगातार सक्रिय कूटनीतिक प्रयास किए हैं। सरकार ने विभिन्न देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय संवाद स्थापित कर युद्धविराम और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में पहल की है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाते हुए यूक्रेन और गाजा जैसे संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता भेजी है। इन सहायता पैकेजों में दवाइयां, चिकित्सा उपकरण और अन्य राहत सामग्री शामिल रही हैं, जिससे संकटग्रस्त लोगों को राहत मिल सके।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए सरकार ने अंतर-मंत्रालयी समन्वय तंत्र भी स्थापित किया है। इस व्यवस्था के तहत ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना की सक्रिय तैनाती और निगरानी भी सुनिश्चित की गई है।

सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि वैश्विक मंचों पर भारत की संतुलित और सक्रिय भूमिका हमेशा से उसकी विदेश नीति का अहम हिस्सा रही है। यह भारत की शांति और मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय संकटों का सीधा असर भारत के व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ रहा है, तब सरकार को केवल कूटनीतिक बयान तक सीमित न रहकर स्पष्ट और पारदर्शी रणनीति भी सामने रखनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि इन वैश्विक घटनाओं के भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत आकलन संसद के समक्ष रखा जाए, ताकि देश के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

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