आंसू बनकर छलका दर्द: बरेली में सैकड़ों विधवाओं की पेंशन बंद,
फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/हैदर अली
महीनों से काट रहीं दफ्तरों के चक्कर, कोई नहीं दे रहा जवाब
डीपीओ दफ्तर में उमड़ीं विधवाएं, बोलीं“न कोई सुनता है, न बताता कि पेंशन क्यों काटी गई”; जांच में फर्जीवाड़े का भी खुलासा, सुहागिनों के खाते में जा रहा था विधवा पेंशन का पैसा
बरेली/बुजुर्ग आंखों में दर्द, हाथों में फाइलें और उम्मीद में सूनी निगाहें… बरेली की सैकड़ों विधवाएं इन दिनों सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। जिन महिलाओं के लिए विधवा पेंशन सहारा थी, वही अब सवाल बन गई है। महीनों से किसी को यह तक नहीं बताया गया कि पेंशन क्यों बंद की गई।
मढ़ीनाथ की पूनम देवी फफक पड़ीं “छह साल से पेंशन मिल रही थी, फरवरी में अचानक बंद हो गई। तब से रोज़ प्रोबेशन ऑफिस के चक्कर लगा रही हूं। दोबारा फॉर्म भी भरा, लेकिन पैसा नहीं आया।”
यह कहानी सिर्फ पूनम देवी की नहीं है। सुदामा देवी, राजरानी और कांशीराम कॉलोनी की रुखसाना जैसी सैकड़ों महिलाएं हैं जिनकी पेंशन बिना कारण रोक दी गई है।
मीडिया बंधु जब डीपीओ कार्यालय पहुंचे तो वहां करीब 40-50 निराश्रित महिलाएं इंतजार करती मिलीं। सभी की जुबान पर एक ही दर्द था “पेंशन क्यों बंद कर दी, कोई बताने को तैयार नहीं।” महिलाओं ने आरोप लगाया कि कार्यालय के लिपिक सीधे मुंह बात तक नहीं करते।
इसी दौरान जब डीपीओ मोनिका राणा से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने मीटिंग में व्यस्त होने का हवाला देकर किसी भी जानकारी से इनकार कर दिया।
फर्जीवाड़े की परतें खुलीं सुहागिनों के खाते में जा रही विधवा पेंशन
मामले की तह में जाएं तो गड़बड़ी केवल पेंशन बंद होने तक सीमित नहीं है। 2023 में आंवला तहसील में 34 सुहागिनों के विधवा पेंशन लेने का मामला सामने आया था। इस साल मई में जांच में फिर 61 सुहागिनों के पेंशन लेने का खुलासा हुआ। आलमपुर जाफराबाद के भीमपुर गांव की दो सुहागिन जेठानी-देवरानी छह साल से विधवा पेंशन ले रही थीं।
डीएम ने मामले की जांच के निर्देश एसडीएम आंवला को दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, हाल ही में 56 अपात्रों के खातों में 1.23 करोड़ रुपये की पेंशन जाने का खुलासा हुआ। कई बिचौलियों ने खुद को “मृत” दिखाकर अपनी पत्नियों के खातों में विधवा पेंशन डलवा ली।
जीवित महिलाओं को ‘मृत’ दिखाकर बंद की पेंशन
भुता ब्लॉक के अहिरौला गांव की विद्या देवी को मृत दिखाकर पेंशन रोक दी गई। जांच में मामला सही निकला तो पंचायत सचिव सुमित गुप्ता को निलंबित कर दिया गया। अब तक ऐसे 32 मामले सामने आए हैं, जिनमें जीवित विधवाओं को मृत बताकर पेंशन बंद कर दी गई।
इन महिलाओं ने डीएम के सामने पेश होकर अपनी जीवित उपस्थिति दर्ज कराई। अब जिलाधिकारी सभी मामलों की जांच करा रहे हैं।
जमीनी हकीकत “कोई सुनवाई नहीं, बस आश्वासन”
कांशीराम कॉलोनी की रुखसाना ने बताया “2011 से पेंशन मिल रही थी, मार्च में अचानक बंद हो गई। डीपीओ दफ्तर के कई चक्कर लगाए लेकिन किसी ने कारण नहीं बताया।”
आजमनगर की शबाना कुरैशी बोलीं “24 जुलाई को दोबारा आवेदन दिया था। कई बार दफ्तर गई, पर जवाब मिला कि जनवरी-फरवरी में आएगी पेंशन।”
डीएम बोले जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई
डीएम अविनाश सिंह ने कहा “जीवित लाभार्थियों की पेंशन रोकने से संबंधित सभी मामलों की जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद जो भी जिम्मेदार होंगे, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
जहां सरकार ‘महिला सशक्तिकरण’ और ‘नारी सम्मान’ की बातें करती है, वहीं बरेली की विधवाएं दर-दर भटक रही हैं। जिनके लिए यह पेंशन जीवन का सहारा थी, वही अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गई है।


