यूजीसी समता विनियम पर आर-पार की लड़ाई: 10 फरवरी को लखनऊ की सड़कों पर उतरेंगी पल्लवी पटेल
भाजपा पर वंचितों के हक दबाने और आंदोलन कुचलने का आरोप, छात्र–नौजवानों से सड़कों पर उतरने का आह्वान
रिपोर्ट/राजेश सिंह
लखनऊ।
अपना दल (कमेरावादी) की शीर्ष नेता और सिराथू विधायक डॉ. पल्लवी पटेल ने यूजीसी समता संवर्धन विनियम 2026 को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। राजधानी लखनऊ में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने साफ कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, लिंग, धर्म और अक्षमता के आधार पर बढ़ते भेदभाव को रोकने के लिए लाए गए यूजीसी विनियम 2026 को जानबूझकर साजिश के तहत न्यायिक प्रक्रिया में उलझाया गया है।
डॉ. पल्लवी पटेल ने आरोप लगाया कि आरएसएस प्रायोजित विरोध के जरिए तथ्यों और तर्कों की बजाय कुतर्कों से यूजीसी विनियम को बदनाम किया गया, ताकि विश्वविद्यालयों में समता स्थापित करने की प्रक्रिया को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीति हमेशा से ही एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के खिलाफ रही है और “फूट डालो, राज करो” की राजनीति के तहत अगड़ा–पिछड़ा के बीच खाई को और गहरा किया जा रहा है।
उन्होंने रोहित वेमुला, दर्शन सोलंकी, पायल तडवी और अनिल कुमार जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे दर्दनाक कांडों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ही यह विनियम लाया गया था, लेकिन इसे जानबूझकर अगड़ा बनाम पिछड़ा की झूठी लड़ाई में बदल दिया गया। जबकि सच्चाई यह है कि यूजीसी विनियम 2026 किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि हर तरह के शोषण और शोषक व्यवस्था के खिलाफ है।
डॉ. पल्लवी पटेल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब वंचित समुदायों के छात्र–नौजवानों ने शांतिपूर्ण तरीके से संवाद, स्टडी सर्किल और चर्चा शुरू की, तो मोदी–योगी सरकार की पुलिस मशीनरी ने बलपूर्वक उन्हें रोकने की कोशिश की।
उन्होंने बताया कि बीएचयू में छात्र आदर्श कुमार पर जानलेवा हमला और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शांतिपूर्ण संवाद कर रहे छात्रों पर हमला किया गया, लेकिन दोनों ही मामलों में पुलिस ने क्रॉस एफआईआर कर आरोपियों को बचाने का काम किया।
डॉ. पल्लवी पटेल ने दो टूक कहा,
“जब संवाद कुचला जाए, न्याय रोका जाए और शोषण को संरक्षण मिले, तो सड़क ही आख़िरी रास्ता बचती है।”
इसी के तहत उन्होंने ऐलान किया कि
10 फरवरी 2026 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सड़कों पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसमें अपना दल (कमेरावादी) के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र–नौजवान बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि
“समता, समान अवसर और सामाजिक न्याय के अधिकार के लिए 10 फरवरी को लखनऊ पहुंचे और इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ दें।”


