यूपी बोर्ड टॉपर विवाद: सर्वोदय जनकल्याण इंटर कॉलेज की जांच को डीआईओएस ने बनाई तीन सदस्यीय कमेटी
कॉपी बदलने और परिवार के बच्चों को फायदा पहुंचाने के आरोपों की होगी जांच, स्कूल प्रबंधन और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी
रिपोर्ट सत्य प्रकाश
बरेली। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम में सर्वोदय जनकल्याण इंटर कॉलेज, खेड़ा बझेड़ा के छात्रों के असाधारण प्रदर्शन को लेकर उठे विवाद की जांच अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। टॉपर छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं बदलने, परिवार विशेष के बच्चों को लाभ पहुंचाने और अन्य अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति ने स्कूल प्रबंधन और शिकायतकर्ता दोनों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी कर दिया है।
दरअसल, यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम में सर्वोदय जनकल्याण इंटर कॉलेज के छात्रों ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की राज्य स्तरीय टॉप-10 सूची में पांच-पांच स्थान हासिल किए थे। वहीं जिला स्तरीय मेरिट सूची में भी हाईस्कूल के दस और इंटरमीडिएट के पांच छात्र शामिल हुए थे। इस अप्रत्याशित सफलता के बाद गांव के निवासी हरीशंकर गुप्ता ने परिणामों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि टॉपर छात्रों की परीक्षा कॉपियों और उनकी पूर्व वर्षों की हस्तलिखित कॉपियों का मिलान कराया जाए। साथ ही विषय विशेषज्ञों की निगरानी में छात्रों का बौद्धिक परीक्षण कराने, कथित वीआईपी रोल नंबर संबंधी दस्तावेजों की हैंडराइटिंग जांच कराने तथा परीक्षा कक्ष, कॉपी क्रमांक और कक्ष निरीक्षकों के हस्ताक्षरों का सत्यापन कराने की मांग की गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईओएस ने राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य अनु पाराशरी, राजकीय हाई स्कूल शिवपुरी के प्रधानाचार्य डॉ. लोकेश चंद्र और राजकीय हाई स्कूल करतौली के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सक्सेना को जांच समिति में शामिल किया है। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच समिति की अध्यक्ष अनु पाराशरी ने बताया कि स्कूल प्रबंधक, प्रधानाचार्य और शिकायतकर्ता को नोटिस देकर उनका पक्ष मांगा गया है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं 5 जून को विद्यालय पहुंचकर पूरे मामले की जांच करेंगी और सभी आरोपों की निष्पक्षता से पड़ताल की जाएगी।
जांच के आदेश के बाद शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रशासन की निगाहें अब समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि टॉपर छात्रों के शानदार प्रदर्शन के पीछे केवल प्रतिभा थी या फिर शिकायतों में उठाए गए आरोपों में कोई सच्चाई भी है।


