आंगनवाड़ी केंद्रों पर ई-पॉस मशीनों की कोई योजना नहीं: सांसद नीरज मौर्या
पोषण वितरण में पारदर्शिता लाने और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए ठोस नीति का अभाव, सरकार के लिखित जवाब से हुआ खुलासा
रिपोर्ट/सत्य प्रकाश
बरेली। आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण सामग्री के वितरण को अधिक पारदर्शी बनाने और संभावित अनियमितताओं को रोकने के लिए ई-पॉस मशीनों और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण लागू करने की फिलहाल केंद्र सरकार की कोई योजना नहीं है। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से सांसद नीरज मौर्य को दिए गए लिखित उत्तर में सामने आई है।
सांसद नीरज मौर्य ने सरकार से सवाल पूछते हुए आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषक आहार वितरण में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए ई-पॉस मशीनों के माध्यम से वितरण और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य करने की व्यवस्था के बारे में जानकारी मांगी थी। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर सहित राज्य के अन्य जिलों में आंगनवाड़ी केंद्रों पर ई-पॉस मशीनों की स्थापना की स्थिति और वहां इंटरनेट कनेक्टिविटी की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाया था।
इसके साथ ही सांसद ने यह भी पूछा था कि जिन क्षेत्रों में सर्वर या इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या रहती है, वहां पोषक आहार के ऑफलाइन वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।
सरकार की ओर से दिए गए जवाब में स्पष्ट किया गया कि फिलहाल आंगनवाड़ी केंद्रों पर ई-पॉस मशीनों और बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने की कोई योजना विचाराधीन नहीं है।
सांसद नीरज मौर्य का कहना है कि जब देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य सरकारी योजनाओं में डिजिटल तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, तब आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण सामग्री वितरण को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि तकनीकी निगरानी प्रणाली लागू नहीं होगी, तो पोषण योजनाओं के लाभार्थियों तक सामग्री की सही और समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करना कठिन हो सकता है।


