आंवला में औद्योगिक क्लस्टर पर सरकार का जवाब निराशाजनक: सांसद नीरज मौर्य
रिपोर्ट सत्य प्रकाश
बरेली। आंवला क्षेत्र में औद्योगिक विकास को लेकर लोकसभा में उठाए गए सवाल पर केंद्र सरकार के जवाब से निराशा सामने आई है। आंवला से सांसद नीरज मौर्य ने क्षेत्र में भारी उद्योगों की स्थापना और औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने से जुड़े मुद्दे को संसद में उठाया था, जिस पर सरकार ने फिलहाल किसी भी योजना या प्रस्ताव के अभाव की बात कही है।
सांसद नीरज मौर्य ने लोकसभा में प्रश्न करते हुए कहा था कि आंवला और आसपास के क्षेत्रों में भारी उद्योगों की कमी के कारण तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है। उन्होंने पूछा था कि क्या सरकार इस समस्या के समाधान के लिए क्षेत्र को कोई विशेष औद्योगिक पैकेज देने या औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की योजना बना रही है।
इस पर भारी उद्योग राज्य मंत्री ने अपने लिखित जवाब में बताया कि उद्योग राज्यों का विषय है, इसलिए भारी उद्योग मंत्रालय देश के किसी विशेष क्षेत्र में नए उद्योगों की स्थापना से संबंधित केंद्रीकृत आंकड़े नहीं रखता। साथ ही मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बरेली-आंवला क्षेत्र में औद्योगिक क्लस्टर स्थापित करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव मंत्रालय के पास विचाराधीन नहीं है।
सरकार ने अपने उत्तर में यह भी स्वीकार किया कि क्षेत्र में बंद पड़ी मशीनरी इकाइयों के पुनरुद्धार के लिए केंद्र स्तर पर कोई बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है।
सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि आंवला क्षेत्र में इफको जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान होने के बावजूद सहायक उद्योगों का अभाव है, जिससे स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा। उन्होंने कहा कि यदि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों को वास्तव में मजबूत बनाना है तो छोटे शहरों और कस्बों में भी औद्योगिक क्लस्टर और सहायक इकाइयों का विकास जरूरी है।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संभावनाओं के बावजूद आंवला क्षेत्र के लिए केंद्र स्तर पर अभी तक कोई ठोस नीति या विशेष पहल सामने नहीं आई है, जो क्षेत्र के विकास के लिए चिंता का विषय है।
