उधार के पैसे मांगने पर दलित युवक से बर्बरता: पिटाई, सिर मुंडन, मूंछ काटकर चेहरे पर कीचड़ पोतने का आरोप
रिपोर्ट/सत्य प्रकाश
बरेली।
यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि सभ्यता के चेहरे पर मारा गया करारा तमाचा है। बरेली में एक दलित व्यक्ति से उधार के पैसे मांगने की “हिम्मत” करने पर जिस तरह की हैवानियत सामने आई है, उसने इंसानियत और कानून—दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि दबंगों ने न सिर्फ पीड़ित की बेरहमी से पिटाई की, बल्कि उसका सिर मुंडवाया, मूंछ काटी और चेहरे पर कीचड़ पोतकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया।
यह कृत्य केवल व्यक्तिगत रंजिश या दबंगई का मामला नहीं है, बल्कि उस विकृत मानसिकता का प्रमाण है जो आज भी जाति और ताकत के नशे में कानून को ठेंगा दिखाती है। गरीब, दलित और कमजोर के सम्मान को सस्ता समझने वाली सोच समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि, केवल एफआईआर और गिरफ्तारी को न्याय नहीं कहा जा सकता। न्याय तब माना जाएगा जब दोषियों को ऐसी कड़ी सज़ा मिले कि भविष्य में कोई भी “दबंग” किसी कमजोर पर हाथ उठाने से पहले सौ बार सोचे।
यह मामला कानून की सख्ती और समाज की शर्म—दोनों की परीक्षा है। यदि ऐसे अपराधों पर निर्णायक और उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो हर गिरफ्तारी के बाद यह बर्बरता किसी नए चेहरे और किसी नई गली में दोहराई जाती रहेगी। समाज और प्रशासन—दोनों को मिलकर यह संदेश देना होगा कि सम्मान पर हमला करने वालों के लिए यहां कोई जगह नहीं।