Tuesday, April 21, 2026
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किशोरों के भावनात्मक स्वास्थ्य एवं काउंसलिंग पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

किशोरों के भावनात्मक स्वास्थ्य एवं काउंसलिंग पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

रिपोर्ट सत्य पकाश

किशोरों के समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से तीन दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन सीकेडी (CKD) एवं टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ (TISS) द्वारा बरेली में किया गया। यह प्रशिक्षण प्रोजेक्ट “उत्थान” के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश (NHM, UP) के आरकेएसके (RKSK) डिवीजन के सहयोग से संपन्न हुआ।

 

प्रशिक्षण के अंतिम दिवस पर डॉ. पवन कापाही, एसीएमओ एवं नोडल अधिकारी (RKSK) ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए और किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाने हेतु सभी को प्रोत्साहित किया।

 

इस प्रशिक्षण में एडोलसेंट हेल्थ काउंसलर्स (AHCs), इंटर कॉलेजों के हेल्थ एंड वेलनेस एम्बेसडर्स (HWAs), नोडल शिक्षकों तथा एसआरजी (SRG) सदस्यों सहित कई प्रतिभागियों ने भाग लिया।

 

कार्यक्रम के दौरान काउंसलिंग स्किल्स, किशोरावस्था में परिवर्तन, आत्मघाती प्रवृत्तियाँ, आत्म-हानि (Self-harm), बुलीइंग, चिंता, अवसाद, ट्रॉमा प्रबंधन तथा सेवाओं की उपलब्धता और पहुँच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा एवं प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए।

 

डॉ. पवन कापाही ने अपने संबोधन में कहा कि “आज के समय में किशोरों के भावनात्मक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक शिक्षक और काउंसलर को यह समझना चाहिए कि संवेदनशील संवाद और प्रभावी काउंसलिंग से ही किशोरों के मनोवैज्ञानिक विकास को सशक्त बनाया जा सकता है।”

 

उन्होंने CKD टीम एवं प्रोजेक्ट “उत्थान” की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण किशोर स्वास्थ्य के क्षेत्र में ठोस सुधार लाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं और यह प्रयास राज्य में किशोर स्वास्थ्य परिणामों (Adolescent Health Outcomes) को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

प्रशिक्षण का उद्देश्य किशोरों के लिए सुरक्षित और सहायक वातावरण तैयार करना, शिक्षकों और काउंसलर्स की क्षमताओं को बढ़ाना, तथा भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देना रहा। प्रतिभागियों ने इंटरएक्टिव अभ्यासों, समूह चर्चा और केस स्टडी के माध्यम से सीखा कि कैसे स्कूल और समुदाय में किशोरों को सहानुभूतिपूर्ण एवं सुनने योग्य माहौल प्रदान किया जा सकता है।

 

कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों के उत्साह और किशोरों के कल्याण हेतु उनके संकल्प के साथ हुआ।

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