Home Poltical *कुपोषण-मुक्त भारत का दावा कठघरे में

*कुपोषण-मुक्त भारत का दावा कठघरे में

0

**कुपोषण-मुक्त भारत का दावा कठघरे में

सांसद नीरज मौर्य के सवालों पर सरकार की पारदर्शिता उजागर**

रिपोर्ट/सत्य प्रकाश 

नई दिल्ली/आंवला-बरेली।

केंद्र सरकार के कुपोषण-मुक्त भारत के दावों की सच्चाई को आंवला-बरेली से समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य ने लोकसभा में उजागर कर दिया। सांसद ने चयनित एक हजार उच्च निष्पादन वाली ग्राम पंचायतों को लेकर सरकार से आंवला सहित उत्तर प्रदेश के लोकसभा क्षेत्रों में चयनित पंचायतों की संख्या और जमीनी प्रभाव पर स्पष्ट जवाब मांगा था।

सरकार की ओर से पंचायती राज मंत्रालय ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों की कार्यशीलता, पेयजल-शौचालय की उपलब्धता और बच्चों-माताओं के पोषण संकेतकों के आधार पर पोषण ट्रैकर के आंकड़ों से पंचायतों का चयन किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि किसी भी राज्य में कुल ग्राम पंचायतों के अधिकतम 10 प्रतिशत को ही “उच्च निष्पादन” की श्रेणी में रखा गया है।

लेकिन सांसद के सवाल का सबसे अहम पहलू यह रहा कि सरकार आंवला जैसे लोकसभा क्षेत्रों में चयनित पंचायतों की वास्तविक संख्या तक बताने में असफल रही। जवाब में मानक और प्रतिशत तो बताए गए, लेकिन यह नहीं बताया गया कि कुपोषण से सबसे अधिक प्रभावित, पिछड़ी और चयन से वंचित पंचायतों के लिए सरकार की ठोस योजना क्या है।

सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि केवल बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों की सूची जारी कर देना सरकार की जिम्मेदारी पूरी नहीं करता। यदि सरकार वास्तव में कुपोषण से लड़ना चाहती है, तो सबसे कमजोर पंचायतों को प्राथमिकता, अधिकारियों की जवाबदेही और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना होगा।

सांसद का साफ कहना है कि कुपोषण-मुक्त भारत का दावा अभी कागजी है, अब सरकार को आंकड़ों के पीछे छिपने के बजाय पारदर्शिता, क्षेत्रीय संतुलन और ठोस कार्रवाई के साथ आगे आना होगा, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंद पंचायतों और परिवारों तक पहुंचे।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version