गोवर्धन पूजा पर बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में अन्नकूट महोत्सव की धूम
फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/हैदर अली
हजारों श्रद्धालुओं ने लिया भाग, भक्ति और एकता का मिला संदेश
बरेली। शहर के प्राचीन और ऐतिहासिक बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में बुधवार को श्री अन्नकूट महोत्सव भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। चारों दिशाओं से श्रद्धालु परिवार समेत पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर समृद्धि और सुख-शांति की कामना की। इस दौरान वातावरण “गोवर्धन महाराज की जय” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा।
अन्नकूट के दर्शन को उमड़ा जनसैलाब
बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में आयोजित इस महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मंदिर परिसर को रंगीन झालरों, फूलों और रोशनी से सजाया गया था। भगवान श्रीकृष्ण के सम्मुख छप्पन भोग सहित सैकड़ों प्रकार के पकवानों से सजा अन्नकूट भोग लगाया गया। दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं ने गोवर्धन पर्वत की प्रतिकृति की पूजा की और भगवान श्रीकृष्ण को अन्न, फल, मिठाइयाँ अर्पित कीं।
धार्मिक व सांस्कृतिक अनुष्ठानों से गुंजायमान रहा मंदिर परिसर
महोत्सव के दौरान मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, भजन-संकीर्तन और महाआरती का आयोजन किया गया। भक्ति संगीत और श्रीकृष्ण की लीलाओं से भरे भजन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर मंदिर के मुख्य आयोजक महंत तुलसीस्थल पंडित नीरज नयन दास ने श्रद्धालुओं को अन्नकूट पर्व का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि “यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, समरसता और भक्ति का प्रतीक है।”
महंत नीरज नयन दास ने बताया अन्नकूट का आध्यात्मिक महत्व
महंत नीरज नयन दास ने प्रवचन देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा के माध्यम से यह सिखाया कि मानवता, समानता और सेवा ही सच्चा धर्म है। उन्होंने कहा,
“गोवर्धन पूजा यह संदेश देती है कि सभी लोग बिना भेदभाव के एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करें, यही सच्ची भक्ति और समाज में एकता का मार्ग है।”
गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा सुन भावविभोर हुए भक्त
महंत तुलसीस्थल ने गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा सुनाते हुए बताया कि द्वापर युग में जब इंद्रदेव के सम्मान में छप्पन भोग अर्पित किए जाते थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू करने का संदेश दिया। इस पर इंद्रदेव क्रोधित होकर ब्रजभूमि में मूसलाधार वर्षा करने लगे, तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। तभी से यह पर्व “गोवर्धन पूजा” और “अन्नकूट उत्सव” के रूप में मनाया जाता है।
गाय की सेवा को बताया श्रीकृष्ण की उपासना का रूप
महंत तुलसीस्थल ने गो सेवा को श्रीकृष्ण भक्ति का प्रमुख अंग बताया। उन्होंने कहा,
“गाय हमारे जीवन की अमूल्य धरोहर है। गाय का दूध, गोबर और मूत्र ये सभी आयुर्वेद में औषधि समान हैं। हमें गोमाता की सेवा को अपने जीवन का धर्म बनाना चाहिए।”
महाआरती और प्रसाद वितरण में उमड़ी भीड़
शाम होते ही मंदिर में महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। दीपों की लौ और शंखध्वनि से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। आरती के बाद भक्तों को अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया गया। भोजन वितरण स्थल पर भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और सभी ने श्रद्धा भाव से प्रसाद ग्रहण किया।
जनप्रतिनिधियों और संतों ने की उपस्थिति इस पावन अवसर पर कई जनप्रतिनिधि, संत-महंत और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथियों में पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, उत्तर प्रदेश के वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार, भाजपा महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना, रामगोपाल मिश्रा सहित शहर के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में पुष्प अर्पित किए और बरेली सहित पूरे प्रदेश की खुशहाली की कामना की।
समापन में मिला भक्ति, सेवा और एकता का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर महंत नीरज नयन दास ने कहा कि अन्नकूट पर्व का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना नहीं, बल्कि मानव समाज को एकता, समानता और सेवा के सूत्र में बांधना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में सादगी, दया और करुणा को स्थान दें यही श्रीकृष्ण भक्ति का सार है।
बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में आयोजित अन्नकूट महोत्सव ने बरेली शहर में भक्ति और उल्लास का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। सुबह से शाम तक चले इस आयोजन में श्रद्धालुओं ने न केवल भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए, बल्कि एकता और सेवा का संदेश भी आत्मसात किया।


