**चर्च संपत्तियों पर संगठित कब्जे का खुलासा
‘मेथोडिस्ट चर्च इन इंडिया’ के नाम पर फर्जीवाड़े से देशभर में अरबों की जमीन हड़पने का आरोप**
संपादक/ धीरेंद्र सिंह ( धीरू) | विशेष जांच
देश के कई राज्यों में चर्च और धार्मिक ट्रस्ट की संपत्तियों पर कथित रूप से एक संगठित गिरोह द्वारा वर्षों से अवैध कब्जा और फर्जीवाड़ा किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि मेथोडिस्ट चर्च इन इंडिया के नाम पर कार्य कर रही एक कथित फर्जी संस्था ने खुद को मूल धार्मिक संगठन का उत्तराधिकारी बताकर देशभर में चर्च की बहुमूल्य जमीनों और भवनों पर कब्जा किया और बाद में उन्हें औने-पौने दामों पर बेच दिया।
दस्तावेजों और न्यायालयों की टिप्पणियों के अनुसार, किसी संस्था का विलय या उत्तराधिकार केवल प्रस्ताव पारित करने से वैध नहीं हो जाता। इसके लिए सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट और अन्य कानूनों के तहत विधिवत विघटन, पंजीकरण और संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया अनिवार्य होती है। अदालतों ने माना है कि बिना कानूनी प्रक्रिया के ट्रस्ट संपत्तियों पर किया गया दावा कानून के विरुद्ध है।
आरोप है कि संस्था से जुड़े पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश, कर्नाटक सहित कई राज्यों में स्थानीय स्तर पर सांठगांठ कर चर्च संपत्तियों की पहचान की और कब्जा जमाया। कुछ मामलों में करोड़ों रुपये की जमीन को बेहद कम कीमत पर बेचने के दस्तावेज सामने आए हैं। धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और विश्वासघात की धाराओं में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं।
कुछ मामलों में जिला प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और संपत्ति हस्तांतरण पर रोक लगाई गई। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में भी कथित संगठित भूमि घोटाले के संकेत मिले हैं। यह मामला अब धार्मिक ट्रस्ट संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।


