जौनपुर में ‘जीरो टॉलरेंस’ की मिसाल: एसपी डॉ. कौस्तुभ की सख़्त कार्रवाई से कानून व्यवस्था पर लगी मुहर
भास्कर न्यूज24/न्यूज एजेंसी
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जौनपुर में शांत स्वभाव लेकिन मजबूत इरादों वाले पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ की कार्यशैली एक बार फिर चर्चा में है। कानून व्यवस्था को बेहतर और प्रभावी बनाने पर लगातार जोर देने वाले एसपी डॉ. कौस्तुभ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिले में अब पुलिसिंग केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई में दिखाई देगी।
राजनीतिक या अन्य किसी भी तरह के दबाव से दूर रहकर निष्पक्ष और सख़्त कार्रवाई करना उनकी पहचान रही है। किसी भी विवाद के सामने आते ही बिना देरी किए तत्काल संज्ञान लेना उनकी संवेदनशील और सक्रिय कार्यशैली को दर्शाता है। वर्ष 2015 बैच के तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी डॉ. कौस्तुभ निर्णय लेने में स्पष्टता और दृढ़ता के लिए जाने जाते हैं।
हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार मनीष यादव के एक ट्वीट के बाद वायरल हुई खबर पर एसपी ने त्वरित कार्रवाई कर यह संकेत दिया कि मीडिया और आम जनता की बातों को गंभीरता से सुना जाता है। विवादों में रहे दारोगा चंदन राय को तत्काल एसपी पीआरओ पद से हटाकर उन्होंने साफ संदेश दिया कि संवेदनशील पदों पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इतना ही नहीं, अंतर्जनपदीय ट्रांसफर के बावजूद जिले में जमे एक अधिकारी को तुरंत रिलीव कराकर एसपी ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब ट्रांसफर आदेश केवल औपचारिकता नहीं रह गए हैं। इस कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में यह संदेश गया है कि कानून सबके लिए समान है, चाहे पद कोई भी हो।
एमबीबीएस डिग्रीधारी आईपीएस डॉ. कौस्तुभ जनता-केंद्रित और पेशेवर पुलिसिंग को प्राथमिकता देते हैं। इससे पहले अंबेडकरनगर, गोरखपुर, वाराणसी, सोनभद्र और महाराजगंज जैसे जिलों में तैनाती के दौरान भी उन्होंने अनुशासन और जवाबदेही की मजबूत मिसाल पेश की है। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए कई सम्मानों से सम्मानित एसपी की हालिया कार्रवाई उनकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को पूरी तरह रेखांकित करती है।
पूरे घटनाक्रम के बाद यह साफ हो गया है कि जौनपुर में कानून व्यवस्था अब सिर्फ कागज़ों या बयानों तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर सख़्त और निष्पक्ष कार्रवाई के रूप में दिखाई दे रही है।
