ताजमहल परिसर में बाल विदुषी लक्ष्मी ने किया शिव तांडव स्तोत्र का पाठ,
फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/हैदर अली
31 अक्टूबर को रिलीज होगी फिल्म “द ताज स्टोरी” ताज को बताया गया ‘तेजोमहालय’
आगरा। ताजमहल परिसर में सोमवार को उस वक्त माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में रंग गया, जब बाल कथावाचक विदुषी लक्ष्मी ने पूरे श्रद्धा भाव से ‘शिव तांडव स्तोत्र’ का पाठ किया। ताज के सामने गूंजती संस्कृत की मंत्रध्वनि ने न सिर्फ दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि पुरातन इतिहास और संस्कृति पर एक नई बहस भी छेड़ दी।
कार्यक्रम के दौरान लक्ष्मी ने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति और उसके प्रतीकों को नए दृष्टिकोण से समझने की जरूरत है। इसी बीच, ताजमहल को लेकर देशभर में चर्चा का विषय बनी फिल्म “द ताज स्टोरी” 31 अक्टूबर को रिलीज होने जा रही है। फिल्म में दावा किया गया है कि विश्वप्रसिद्ध ताजमहल दरअसल एक प्राचीन हिंदू मंदिर “तेजोमहालय” है, जिसे मुगल काल में परिवर्तित किया गया।
फिल्म के ट्रेलर के जारी होने के बाद से ही विवाद और उत्सुकता दोनों बढ़ गई हैं। इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के बीच मतभेद साफ झलक रहे हैं कोई इसे ऐतिहासिक पुनर्व्याख्या बता रहा है, तो कोई सांस्कृतिक जागरण की पहल।
ताजमहल परिसर में हुए शिव स्तोत्र पाठ को कई हिंदू संगठनों ने “सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक” बताया है। वहीं कुछ लोगों ने इसे स्मारक की ऐतिहासिक गरिमा से खिलवाड़ बताया।
अब सबकी निगाहें 31 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब “द ताज स्टोरी” बड़े पर्दे पर आएगी और देश एक बार फिर इतिहास बनाम आस्था की बहस में डूब जाएगा।


