तौकीर रजा की बढ़ी मुश्किलें! छह साल पुराने CAA बवाल केस में भी पुलिस हुई एक्टिव, रिमांड मांगा कानून का शिकंजा कसता जा रहा है
फिरोज खान भास्कर टुडे
रिपोर्ट-राजेश सिंह
बरेली से बड़ी खबर, अब पुराने केस की फाइल भी खुली दीपावली से पहले बड़ा एक्शन संभव
बरेली बवाल में जेल में बंद इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां की मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रहीं। जहां 26 सितंबर के बरेली उपद्रव मामले में मौलाना पहले से ही न्यायिक अभिरक्षा में हैं, वहीं अब पुलिस ने साल 2019 के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शन से जुड़े पुराने केस में भी उनकी रिमांड मांगी है। पुलिस का रुख अब बेहद सख्त बताया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, यह वही मामला है जब दिसंबर 2019 में केंद्र सरकार ने CAA और NRC का प्रस्ताव लाया था। उस समय देशभर में विरोध प्रदर्शन भड़के थे और बरेली में भी मौलाना तौकीर रजा ने निषेधाज्ञा के बावजूद लोगों को प्रदर्शन के लिए उकसाया था। शहर में नारेबाजी, पथराव और तोड़फोड़ हुई थी, जिसके बाद कोतवाली थाने में मौलाना समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
छह साल पुरानी फाइल फिर खुली — अब तक दबा था मामला
जानकारी के अनुसार, 2019 के इस मामले में पुलिस ने अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की थी। मामला कई वर्षों तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। इस दौरान कई विवेचक (Investigating Officers) बदले, लेकिन किसी ने न तो चार्जशीट लगाई और न ही एफआर (Final Report) डालने की हिम्मत की।
अब, मौजूदा विवेचक ने फाइल दोबारा खोली है और मौलाना तौकीर रजा को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी की जा रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मौलाना से उस समय हुए विरोध प्रदर्शन की योजना, फंडिंग, और बाहरी जिलों से आए उपद्रवियों की भूमिका को लेकर सवाल पूछे जाएंगे।
इस बीच, जानकारी यह भी सामने आई है कि संभल जिले में भी 2019 के दौरान तौकीर रजा के खिलाफ एक रिपोर्ट दर्ज हुई थी, जो अब दोबारा एक्टिव हो सकती है। यानी मौलाना के खिलाफ कानूनी शिकंजा सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं रहने वाला।
पुलिस ने कोर्ट से मांगा रिमांड — दीपावली से पहले पेशी पर सस्पेंस
पुलिस ने कोर्ट से तौकीर रजा का रिमांड मांगा है, ताकि उनसे आमने-सामने पूछताछ की जा सके। हालांकि, सुरक्षा और शांति-व्यवस्था के मद्देनज़र पुलिस किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहती। मौलाना इस समय फतेहगढ़ जेल में बंद हैं, और सूत्रों का कहना है कि पुलिस उनकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कराने पर विचार कर रही है।
दरअसल, दीपावली से पहले शहर का माहौल नाजुक माना जा रहा है। ऐसे में प्रशासन नहीं चाहता कि किसी भी बहाने से मौलाना को कोर्ट में लाने-जाने से तनाव बढ़े।
मौलाना की अगली न्यायिक अभिरक्षा पेशी 10 अक्टूबर को तय है, और माना जा रहा है कि उसी दिन वीडियो लिंक के जरिए उनकी पेशी कराई जा सकती है।
डॉ. नफीस खान और नदीम खान भी रडार पर
इधर, बरेली बवाल में एक नया मोड़ तब आया जब IMC के लेटर पैड पर फर्जी हस्ताक्षर करने का मामला सामने आया। पुलिस ने इस प्रकरण में डॉ. नफीस खान और नदीम खान को भी रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी की है।
दरअसल, इन दोनों पर आरोप है कि उन्होंने लियाकत खान के नाम से फर्जी हस्ताक्षर किए और एक विवादित पत्र जारी किया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इससे पुलिस गुमराह हुई और शहर में अफवाहों ने माहौल गरमाया।
अब जब लियाकत खान ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है, तो पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज बनाने और वायरल करने के पीछे असली मकसद क्या था, और क्या इसका सीधा संबंध 26 सितंबर को हुए बरेली बवाल से है।
मौलाना तौकीर रजा पर कानून का शिकंजा कसता जा रहा है
26 सितंबर को “I Love Muhammad” पोस्टर विवाद से शुरू हुए बरेली बवाल के बाद से ही मौलाना तौकीर रजा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
पहले बरेली पुलिस ने उन्हें मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए गिरफ्तार किया, फिर बीडीए ने उनके करीबी नदीम खां की दुकानों पर बुलडोजर चलाया। अब 2019 के पुराने केस की फाइल खोलने से साफ है कि प्रशासन और पुलिस किसी भी ढील के मूड में नहीं हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मौलाना के पुराने भाषण और सोशल मीडिया पर सक्रिय नेटवर्क की जांच जरूरी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मौलाना से पूछताछ में यह भी पता लगाया जाएगा कि उन्होंने 2019 और 2025 दोनों घटनाओं में किन लोगों से संपर्क रखा था और क्या दोनों घटनाओं में एक जैसी रणनीति अपनाई गई थी।
शहर में चर्चा “अब कानून अपनी रफ्तार से चलेगा”
बरेली में इन दिनों मौलाना तौकीर रजा के समर्थक खामोश हैं, जबकि प्रशासन ने साफ संकेत दे दिया है कि “अब कानून अपनी रफ्तार से चलेगा।”
सूत्रों का कहना है कि पुलिस टीम पुराने डिजिटल सबूत, वीडियो क्लिपिंग, सोशल मीडिया पोस्ट और उस समय के बयान भी खंगाल रही है।
पुलिस की इस कार्रवाई को कई लोग “ऑपरेशन तौकीर पार्ट-2” के रूप में देख रहे हैं। प्रशासन ने 2025 के बवाल के बाद पहले ही मौलाना के कई करीबी साथियों पर शिकंजा कसा है, अब पुराने मामलों को भी खंगाला जा रहा है ताकि साजिश की पूरी कड़ी उजागर की जा सके।
दीपावली से पहले बड़ा एक्शन संभव कुल मिलाकर, बरेली पुलिस अब तौकीर रजा के खिलाफ मल्टी-लेयर जांच में जुट गई है एक तरफ 26 सितंबर के बरेली बवाल की फाइल खुली है, दूसरी तरफ 2019 के CAA विरोध प्रदर्शन की फाइल फिर से सक्रिय कर दी गई है।
ऐसे में माना जा रहा है कि दीपावली से पहले पुलिस कोई बड़ा कदम उठा सकती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या कोर्ट पुलिस की रिमांड अर्जी मंजूर करता है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि मौलाना तौकीर रजा की कानूनी परेशानियां अब तेजी से बढ़ रही हैं — और बरेली में हर अगला दिन उनके लिए एक नई मुश्किल लेकर आ रहा है।


