पूर्व सैनिक दिवस पर बरेली में भव्य आयोजन, जाट रेजिमेंटल पीटी ग्राउंड में होगा कार्यक्रम
रिपोर्ट/राजेश सिंह
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बरेली। देश की सेवा कर चुके पूर्व सैनिकों, उनके परिजनों, वीरांगनाओं तथा शहीदों की विधवाओं से सीधा संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से 14 जनवरी को पूर्व सैनिक दिवस के अवसर पर एक विशाल कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम जाट रेजिमेंटल पीटी ग्राउंड में आयोजित होगा।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कर्नल दिनेश एस. शुक्ला ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस बार भी आयोजन का मुख्य उद्देश्य पूर्व सैनिकों को केंद्र व राज्य सरकार तथा सेना द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, सुविधाओं और सहायता कार्यक्रमों की जानकारी देना है, साथ ही उनकी व्यक्तिगत व सामूहिक समस्याओं को सुनकर समाधान सुनिश्चित करना है।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः रीथ लेइंग से होगी, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना के पूर्व अधिकारी, जेसीओ एवं जवान भाग लेंगे। इसके बाद स्टेशन कमांडर, चीफ ऑफ स्टाफ (नॉर्थ) और जीओसी उत्तर भारत द्वारा शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। तत्पश्चात सभी अतिथि मुख्य पंडाल में पहुंचेंगे।
सुबह लगभग साढ़े दस बजे पूर्व सैनिकों का आगमन होगा, जहां उनके लिए जलपान की व्यवस्था रहेगी। इसके बाद वे विभिन्न विभागीय स्टॉलों का लाभ उठा सकेंगे। इन स्टॉलों में स्पर्श, ईसीएचएस, मेडिकल कैंप, बैंकिंग सेवाएं, रोजगार एवं कल्याण से जुड़ी संस्थाएं शामिल रहेंगी।
करीब 11:20 बजे कर्नल दिनेश एस. शुक्ला पूर्व सैनिकों को संबोधित करेंगे और सेना द्वारा संचालित नई योजनाओं, कल्याणकारी पहलों तथा आर्थिक सहायता से जुड़ी जानकारियां साझा करेंगे। इसके पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनमें झांझी, घटका और खुखरी नृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। मुख्य अतिथि के आगमन पर बैंड डिस्प्ले भी प्रस्तुत किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पूर्व सैनिकों, वीर योद्धाओं, वीरांगनाओं, विधवाओं तथा विक्ट्री कम रिलीफ फंड के आश्रितों को सम्मानित करते हुए सहायता राशि प्रदान की जाएगी। जीओसी उत्तर भारत के संबोधन के बाद वेटरन हैंडबुक का विमोचन किया जाएगा। धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन होगा। इसके उपरांत स्टॉलों का भ्रमण एवं सामूहिक भोज का आयोजन किया जाएगा।
कर्नल शुक्ला ने कहा कि यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के साथ निरंतर संवाद और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने का माध्यम है, जिससे उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
