प्रसिद्ध लोकगायक दीवान कनवाल का आकस्मिक निधन, लोक संगीत जगत में शोक की लहर
रिपोर्ट सत्य प्रकाश
बरेली। उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक दीवान कनवाल के आकस्मिक निधन से लोक संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। अपनी मधुर आवाज और कर्णप्रिय गीतों के जरिए उन्होंने वर्षों तक श्रोताओं के दिलों पर राज किया और लोक संगीत को नई पहचान दिलाई।
दीवान कनवाल ने लोक संगीत के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा से आम और खास सभी को प्रभावित किया। बरेली में उनकी यादगार प्रस्तुति उत्तराखंड स्थापना दिवस के अवसर पर 09 नवंबर 2025 को स्थानीय संजय गांधी कम्युनिटी हॉल में हुई थी। इस कार्यक्रम में उन्होंने अपने जोड़ीदार डॉ. अजय ढौंडियाल, प्रसिद्ध सिने अभिनेता अनिल घिल्डियाल और अभिनेत्री अंकिता परिहार के साथ मंच साझा किया था। उनकी प्रस्तुति ने वहां मौजूद दर्शकों का दिल जीत लिया था।
पर्वतीय समाज के अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह देवलिया ने कहा कि दीवान कनवाल का सरल और मिलनसार स्वभाव सभी को अपना बना लेता था। वहीं समाज के सचिव डॉ. नरेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि कुमाऊनी भाषा की पहली फीचर फिल्म “मेघा आ” में उनके गाए गीतों ने दर्शकों को काफी प्रभावित किया था।
समाज के निर्देशक उमेश बिनवाल ने बताया कि दीवान कनवाल आकाशवाणी नजीबाबाद से बी ग्रेड और आकाशवाणी अल्मोड़ा से बी हाई ग्रेड कलाकार रहे। उन्होंने लोक संगीत की शिक्षा प्रसिद्ध लोकगायक मोहन उप्रेती के संरक्षण में प्राप्त की थी।
फिल्म निर्देशक और कलाकार देवेन्द्र रावत ने कहा कि दीवान कनवाल का सांस्कृतिक क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान रहा, लेकिन इसके बावजूद वह हमेशा जमीन से जुड़े रहे और उनके अंदर जरा भी अभिमान नहीं था। कुमाऊँ फिल्म के निर्माता-निर्देशक अशोक उप्रेती ने उनके निधन को समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
फिल्म कैमरामैन शुभाशीष जोशी के अनुसार दीवान कनवाल अपने अधिकतर गीतों की रचना और कंपोजिशन स्वयं करते थे। वह वर्तमान में अल्मोड़ा कोऑपरेटिव बैंक में ब्रांच मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत काफी नाजुक चल रही थी।
उनके निधन से उत्तराखंड के लोक संगीत और सांस्कृतिक जगत को गहरा आघात पहुंचा है। कलाकारों और उनके चाहने वालों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।