फरजाना का आरोप “मेरे पति को साजिश के तहत झूठे केस में फंसाया गया”,
फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/हैदर अली
कहा- न मौलाना तौकीर रजा से लेना-देना, न आईएमसी पार्टी से संबंध
बरेली में 26 सितंबर के बवाल पर नया मोड़, बेगुनाहों को फंसाए जाने के आरोपों से जांच पर उठे सवाल
बरेली। 26 सितंबर को मौलाना तौकीर रजा के बुलावे पर हुई सभा और उसके बाद हुए बवाल के मामले में अब नए आरोपों ने पुलिस जांच की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना इज्जतनगर क्षेत्र के गांव फरीदाबाद चौधरी निवासी फरजाना ने अपने पति शफी अहमद को झूठे मुकदमे में फंसाए जाने की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बरेली से की है।
फरजाना का कहना है कि उनका पति एक साधारण दिहाड़ी मजदूर है, जो दिन-भर मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता है। उसका न तो मौलाना तौकीर रजा से कोई व्यक्तिगत या राजनीतिक संबंध है, और न ही उसने आईएमसी (इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल) पार्टी की किसी सभा, रैली या बैठक में कभी हिस्सा लिया है।
“पुलिस अचानक घर पहुंची और पति को आरोपी बताया”फरजाना
फरजाना ने बताया कि बीते शुक्रवार को पुलिस टीम उनके घर पहुंची और कहा कि जांच के दौरान उनके पति शफी अहमद का नाम 26 सितंबर के बवाल में सामने आया है। इस पर फरजाना ने विरोध जताते हुए कहा कि उनका परिवार किसी भी राजनीतिक या धार्मिक आंदोलन से जुड़ा नहीं है।
उन्होंने कहा, “मेरे पति तो सुबह से शाम तक मजदूरी करते हैं। बवाल के दिन भी वह काम पर गए थे। कुछ लोग पुरानी रंजिश के कारण उनके नाम को जानबूझकर जांच में शामिल करा रहे हैं ताकि उन्हें परेशान किया जा सके।”
“मोबाइल लोकेशन से साबित होगा सच” एसएसपी से निष्पक्ष जांच की मांग
फरजाना ने एसएसपी बरेली को प्रार्थना पत्र देकर मांग की है कि उनके पति की मोबाइल लोकेशन की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से कराई जाए। इससे यह साफ हो जाएगा कि बवाल के दौरान शफी अहमद घटनास्थल पर थे भी या नहीं।
उन्होंने कहा कि अगर निष्पक्ष जांच की जाए तो उनके पति की बेगुनाही साबित हो जाएगी। “हमें न्याय पर भरोसा है। हम सिर्फ यही चाहते हैं कि निर्दोष लोगों को परेशान न किया जाए,” फरजाना ने कहा।
आपको बता दे 26 सितंबर को तौकीर रजा के बुलावे पर जुटी थी भीड़
गौरतलब है कि 26 सितंबर को मौलाना तौकीर रजा के आह्वान पर बरेली में बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे। इसी दौरान अचानक भीड़ के उग्र हो जाने से इलाके में तनाव और बवाल की स्थिति पैदा हो गई थी। पुलिस ने कई अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था और वीडियो फुटेज के आधार पर जांच जारी है।
अब जब फरजाना जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं, तो यह मामला और जटिल होता दिख रहा है। कई स्थानीय लोगों ने भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाए हैं कि कहीं पुलिस जांच के दौरान निर्दोष लोगों को राजनीतिक या व्यक्तिगत रंजिश के चलते तो निशाना नहीं बनाया जा रहा।
पुलिस क्या कहती है इस मामले पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और जिन लोगों के नाम या सबूत सामने आएंगे, उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एक अधिकारी ने बताया, “हर शिकायत को गंभीरता से लिया जा रहा है। यदि कोई निर्दोष है, तो उसे किसी भी कीमत पर परेशान नहीं किया जाएगा।”
स्थानीय लोगों की राय
गांव के कुछ निवासियों ने बताया कि शफी अहमद वास्तव में मेहनतकश व्यक्ति हैं और राजनीति से दूर रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को तथ्यों के आधार पर ही कार्रवाई करनी चाहिए ताकि निर्दोष लोग न्याय से वंचित न हों।
फरजाना का मामला अब बरेली पुलिस की जांच के लिए एक अहम कसौटी बन गया है। देखना होगा कि क्या मोबाइल लोकेशन और तकनीकी जांच से सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं। फिलहाल, फरजाना और उनके परिवार की निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं, जो “निष्पक्ष जांच” की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
