
बरेली में बीएलओ शिक्षक की मौत कि कहानी; दो माह पहले पत्नी कि भी कैंसर से मौत हो गईं थीं, जुड़वा बच्चे अनाथ
फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/राजेश सिंह
बरेली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य के दौरान भोजीपुरा ब्लॉक में बीएलओ एवं सहायक अध्यापक सर्वेश कुमार गंगवार (47) की बुधवार को हार्ट अटैक से मौत हो गई। मात्र दो महीने पहले उनकी पत्नी की कैंसर से मौत हो चुकी थी। अब उनके पांच वर्षीय जुड़वा बच्चे अहाना और अयांश पूरी तरह अनाथ हो गए हैं। परिवार और शिक्षकों में शोक की लहर है।
विद्यालय में काम करते समय गिर पड़े शिक्षक
जानकारी के अनुसार परधौली गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में सर्वेश एसआईआर कार्य कर रहे थे, इसी दौरान अचानक वह कुर्सी से गिर पड़े और उनकी नाक से खून बहने लगा। साथी शिक्षकों ने तुरंत नजदीकी डॉक्टर को दिखाया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें मिनी बाइपास स्थित प्रताप अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
मामले की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी अविनाश सिंह, पुलिस अधिकारी तथा शिक्षा विभाग के अधिकारी अस्पताल पहुंच गए। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।
दो महीने पहले पत्नी की मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सर्वेश के बड़े भाई योगेश गंगवार ने बताया कि वर्ष 2015 में शिक्षक के पद पर उनकी नियुक्ति हुई थी। सितंबर 2025 में उनकी पत्नी प्रभा गंगवार का कैंसर से निधन हो गया था। पति-पत्नी दोनों की मौत के बाद घर में केवल पांच वर्ष के दो जुड़वा बच्चे ही शेष रह गए हैं, जिन्हें लेकर परिवार बेहद चिंतित है।
प्रशासन देगा हर संभव मदद
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि सर्वेश की मृत्यु हार्ट अटैक से हुई है। नियमों के अनुसार परिवार को सभी सरकारी लाभ उपलब्ध कराए जाएंगे। बच्चों की सहायता के लिए जिला प्रशासन भी हर संभव मदद करेगा।
एक करोड़ रुपये मुआवजे और आश्रित को नौकरी की मांग
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नरेश गंगवार ने कहा कि एसआईआर के भारी दबाव ने शिक्षक की जान ले ली। उन्होंने मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजे और आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग की।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष शिवचरन कश्यप और महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी भी पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे और एसआईआर कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए समयसीमा छह माह करने तथा परिवार की आर्थिक सहायता की मांग की।
मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ थे सर्वेश
सहकर्मियों ने बताया कि पत्नी की मौत के बाद से सर्वेश मानसिक रूप से दुखी थे, लेकिन उन्होंने अपने जुड़वा बच्चों की परवरिश और ड्यूटी दोनों को पूरी जिम्मेदारी से संभाला। चार दिन पहले ही जिले और प्रदेश स्तर पर उनके निर्वाचन कार्य की प्रशंसा हुई थी।