बरेली से रामपुर तक सियासी हलचल: अखिलेश ने बरेली में छोड़ा सांसद,अकेले पहुंचे आजम खान से मिलने बंद कमरे में चली 1 घंटे की गुप्त बैठक, सपा में उबाल!
रिपोर्ट- कार्यालय संवाददाता
रामपुर। उत्तर प्रदेश की सियासत में बुधवार का दिन सपा (समाजवादी पार्टी) के लिए बेहद अहम रहा। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का यह दौरा सिर्फ एक मुलाकात नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी समीकरणों का बड़ा संकेत बन गया है।
अखिलेश यादव लखनऊ से सीधे बरेली पहुंचे, और वहां से हेलीकॉप्टर के ज़रिए रामपुर रवाना हुए लेकिन सियासी गलियारों में हलचल तब मची, जब उन्होंने रामपुर के सांसद मोहिबुल्ला नदवी को बरेली एयरपोर्ट पर ही छोड़ दिया।
सपा सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव ने यह फैसला आजम खान के डर से लिया, क्योंकि रामपुर की राजनीति में आजम खान की पकड़ आज भी बेहद मजबूत मानी जाती है। कहा जा रहा है कि अखिलेश नहीं चाहते थे कि मुलाकात के दौरान किसी प्रकार का असहज माहौल या टकराव की स्थिति बने, इसलिए वे रामपुर अकेले पहुंचे।
बंद कमरे में 1 घंटे चली अहम बैठक
अखिलेश यादव के हेलीकॉप्टर ने जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में बने हेलीपैड पर दोपहर करीब 12:45 बजे लैंड किया। आजम खान खुद वहां मौजूद थे और उन्होंने सपा प्रमुख का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता सीधे आजम खान के आवास पहुंचे, जहां करीब 1 घंटे तक बंद कमरे में गुप्त बैठक चली। इस बैठक में सिर्फ अखिलेश यादव और आजम खान मौजूद रहे, किसी तीसरे व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी।
बैठक के दौरान किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसका आधिकारिक बयान भले न आया हो, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह बैठक आगामी चुनावों, रामपुर की सियासत और आजम खान परिवार से जुड़े मामलों पर केंद्रित रही।
अखिलेश यादव का तीखा बयान “सत्ता झूठे मुकदमों का रिकॉर्ड बना रही है”
करीब 2 घंटे 25 मिनट के इस दौरे के बाद जब अखिलेश यादव बाहर आए, तो उन्होंने सरकार पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा
“योगी सरकार एक राजनीतिक परिवार पर झूठे मुकदमे दर्ज करने का गिनीज बुक रिकॉर्ड बना रही है। आजम खान समाजवादी पार्टी का वह मजबूत दरख्त हैं, जिसकी जड़ें इतनी गहरी हैं कि कोई भी सत्ता उसे हिला नहीं सकती।”
अखिलेश के इस बयान ने न सिर्फ आजम खान के प्रति सम्मान जताया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि समाजवादी पार्टी में आजम खान का राजनीतिक वजूद अब भी अडिग है।
एक तस्वीर ने बढ़ाई हलचल अब्दुल्ला आजम की ‘वापसी’ के संकेत
इस मुलाकात की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसने चर्चा को और हवा दे दी। तस्वीर में अखिलेश यादव और आजम खान सोफे पर आमने-सामने बैठे हैं, जबकि अब्दुल्ला आजम झुककर गंभीरता से कुछ समझाते दिख रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस तस्वीर को रामपुर में अब्दुल्ला आजम की सक्रिय राजनीति में संभावित वापसी का संकेत माना जा रहा है।
⚖️ आजम परिवार पर कानूनी शिकंजा, पर सपा का भरोसा कायम
गौरतलब है कि आजम खान, उनकी पत्नी तंजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला आजम को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र केस में 7 साल की सजा सुनाई गई है। इसके चलते तीनों अगले छह साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
फिर भी अखिलेश यादव की यह मुलाकात इस बात की पुष्टि करती है कि समाजवादी पार्टी अब भी आजम परिवार को अपने राजनीतिक ढांचे का अहम स्तंभ मानती है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह दौरा “औपचारिक भेंट” नहीं था, बल्कि 2027 विधानसभा चुनावों से पहले सपा की ‘रामपुर पुनर्स्थापना रणनीति’ का हिस्सा था। रामपुर में आजम खान का कद पार्टी के लिए अपरिहार्य है, और अखिलेश यादव ने अपने इस कदम से यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी में किसी तरह की दूरी या मतभेद नहीं है।
उठे नए सवाल — डर, रणनीति या सियासी मजबूरी?
अब सपा के अंदर और बाहर दोनों जगह सवाल उठ रहे हैं —
क्या अखिलेश यादव का अपने ही सांसद मोहिबुल्ला नदवी को बरेली में छोड़ना यह दर्शाता है कि सपा में रामपुर के “आजम कैंप” और “मुख्यालय कैंप” के बीच दूरी अब भी बरकरार है?
या फिर यह एक सियासी रणनीति थी ताकि आजम खान को यह संदेश दिया जा सके कि पार्टी उनके सम्मान में कोई समझौता नहीं करेगी?
आपको बता दे
अखिलेश यादव ने आजम खान से मुलाकात से पहले अपने ही सांसद को बरेली में छोड़कर यह साफ कर दिया रामपुर में ‘दरख्त’ अब भी वही पुराना खड़ा है, जिसकी छांव से कोई नहीं बच सकता।”
रामपुर की इस मुलाकात ने एक बात तो साफ कर दी समाजवादी राजनीति का केंद्र अब भी आजम खान हैं, और अखिलेश यादव के इस दौरे ने पार्टी के भीतर एक नए समीकरण और पुराने डर दोनों को फिर से जगा दिया है।
