रामपुर CRPF कैंप हमला मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चारों दोषियों की फांसी की सजा रद्द की,
फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/हैदर अली
जांच में खामियां बताई गईं
2008 के हमले में शहीद हुए थे 8 CRPF जवान, कोर्ट ने IPC 302 में आरोपियों को किया बरी
इलाहाबाद। 2008 में उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित CRPF कैंप पर हुए आतंकी हमले के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने चारों दोषियों शरीफ, सबाउद्दीन, इमरान और फारूख की फांसी की सजा को रद्द करते हुए उन्हें IPC की धारा 302 (हत्या) के आरोप से दोषमुक्त कर दिया है।
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने कहा कि इस मामले की जांच में गंभीर खामियां थीं। जांच एजेंसी हमले में इस्तेमाल AK-47 रायफल की जब्ती और रखरखाव को लेकर पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की संलिप्तता को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
गौरतलब है कि 1 जनवरी 2008 की तड़के रामपुर स्थित CRPF कैंप पर हुए इस हमले में आठ CRPF जवान और एक नागरिक शहीद हुए थे। जांच एजेंसियों ने इस हमले को लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा बताया था और चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था।
ट्रायल कोर्ट ने 2019 में चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि सबूतों के अभाव में किसी को मौत की सजा नहीं दी जा सकती।
इस फैसले के बाद मृत जवानों के परिजन निराश हैं, जबकि आरोपियों के परिवारों ने न्यायपालिका के निर्णय का स्वागत किया है। राज्य सरकार इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है।
