लंबित चकबंदी पर बड़ा प्रहार, धारा-52(1) के तहत 43 गांवों का प्रख्यापन।
संपादक/धीरेंद्र सिंह (धीरू )
प्रदेश में वर्षों से लंबित पड़ी चकबंदी प्रक्रिया को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद के निर्देशों के क्रम में उत्तर प्रदेश के 23 जनपदों के 43 गांवों में चकबंदी कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इसके साथ ही उ0प्र0 जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-52(1) के अंतर्गत प्रख्यापन जारी कर चकबंदी की औपचारिक समाप्ति कर दी गई है।
चकबंदी आयुक्त ने जनपदीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर लंबे समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता पर निस्तारित करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में संबंधित जनपदों के बंदोबस्त अधिकारियों और जिलाधिकारियों की समिति द्वारा गहन परीक्षण के बाद प्रस्ताव शासन को भेजे गए, जिन पर स्वीकृति प्रदान की गई।
चकबंदी कार्य पूर्ण होने वाले गांवों में जौनपुर, कन्नौज, बस्ती, मैनपुरी, प्रतापगढ़, औरैया, बहराइच, मीरजापुर, बरेली, गोंडा, सिद्धार्थनगर, हमीरपुर, संतकबीर नगर, बलिया, महराजगंज, चंदौली, फतेहपुर, रामपुर, लखीमपुर खीरी, सुलतानपुर और सोनभद्र सहित कुल 23 जनपद शामिल हैं।
इन गांवों में कई ऐसे ग्राम भी हैं जहां चकबंदी प्रक्रिया तीन से चार दशक से अधिक समय से लंबित थी। जौनपुर का ग्राम बेल्छा पिछले 46 वर्षों से, कन्नौज के सरदामई और कठिगरा 45 वर्षों से, मैनपुरी का बलपुरा और बस्ती का सूसीपार 35 वर्षों से तथा प्रतापगढ़ का ग्राम धीमी 30 वर्षों से चकबंदी प्रक्रियाधीन था।
चकबंदी आयुक्त के सघन पर्यवेक्षण और जिलाधिकारियों व विभागीय अधिकारियों के समन्वित प्रयासों से इन जटिल मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण संभव हो सका।
चकबंदी कार्य पूर्ण होने से अब किसानों को सार्वजनिक सुविधाओं, बेहतर कृषि व्यवस्था और ग्राम विकास योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा। चकबंदी विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगे भी शेष लंबित मामलों का निस्तारण प्राथमिकता और समयबद्ध तरीके से किया जाता रहेगा।
