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लोकसभा में नीरज मौर्य का सरकार पर हमला, आयुष्मान योजना में बढ़ते आंकड़ों के बीच गुणवत्ता पर उठे सवाल

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लोकसभा में नीरज मौर्य का सरकार पर हमला, आयुष्मान योजना में बढ़ते आंकड़ों के बीच गुणवत्ता पर उठे सवाल

रिपोर्ट/सत्य प्रकाश 

आंवला सांसद नीरज मौर्य ने लोकसभा में आयुष्मान भारत योजना को लेकर सरकार को घेरते हुए निजी अस्पतालों की भूमिका और योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सांसद द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देशभर में कुल 15,733 निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना में पैनलबद्ध हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में यह संख्या 1,591 है।

मंत्री ने यह भी बताया कि इनमें से 7,247 निजी अस्पताल केवल जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच जोड़े गए हैं। जिलावार आंकड़ों में बरेली में 209, शाहजहांपुर में 24 और बदायूं में मात्र 14 निजी अस्पताल पैनलबद्ध बताए गए हैं, जो पिछड़े जिलों में सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं की ओर इशारा करता है।

सरकार के अनुसार, सितंबर 2018 में योजना शुरू होने के बाद से 31 दिसंबर 2025 तक देशभर में 11.22 करोड़ अस्पताल भर्तियां हुईं, जिनमें लगभग 49 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा, देशभर में अब तक 85.48 करोड़ आभा (ABHA) अकाउंट बनाए जा चुके हैं।

सांसद नीरज मौर्य ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल खाते बन जाना या अस्पतालों की संख्या बढ़ जाना ही सफलता का पैमाना नहीं है। असली चुनौती यह है कि जरूरतमंदों को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और सुलभ इलाज वास्तव में मिल रहा है या नहीं। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में समान पहुंच को लेकर सरकार का जवाब अधूरा है।

सांसद ने यह भी कहा कि बदायूं और शाहजहांपुर जैसे जिलों में पैनलबद्ध अस्पतालों की संख्या बेहद कम है, जिससे योजना का लाभ वहां के गरीब मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा। उन्होंने हाल ही में बरेली के चार निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से जुड़े फर्जीवाड़े का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।

इसके साथ ही सांसद ने देशभर में पैनलबद्ध 15,733 निजी अस्पतालों में से केवल डायलिसिस सेंटर और आंखों के इलाज से जुड़े केंद्रों की वास्तविक संख्या की भी जानकारी सरकार से चाही है। नीरज मौर्य ने मांग की कि सरकार आयुष्मान भारत योजना की गहन समीक्षा करे, ताकि यह योजना कागजों तक सीमित न रहकर वास्तव में गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सके।

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