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विश्व रेडियो दिवस पर विशेष

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विश्व रेडियो दिवस पर विशेष

बरेली,रेडियो बस एक मशीन नहीं है, क्रांति है मानसिक संक्रांति का ! एक प्राकृतिक अलंकार है मानव जीवन का ! चमत्कार है भावनाओं का, जिसे सुनने वाला पीयूष रस के आस्वादन की तरह ही शब्दों में बयां नहीं कर पाता। एक रेडियो एक्टिव व्यक्ति के लिए इससे बड़ा कोई नशा नहीं है। नशा भी ऐसा जो फकीरी में भी अमीरी का एहसास कराता है। अपाहिज़ को भी आसमान की सैर कराता है। रेडियो के कार्यक्रम खासकर गानों वाले कार्यक्रम श्रोता के मानसिक ऊर्जा का प्रवाह एक्टिव कर देते हैं। इससे श्रोता अपने काम सतत् लगन और पूरे मनोयोग से करता चलता है बिना किसी राग द्वेष के, बिना किसी चिंता फिकर के ! अगर कोई दिक्कत हो तो भी एक दोस्त हर वक्त होता है रेडियो एक्टिव श्रोता के पास उसका हमदम, हमकदम हमसफर..जिसका नाम है रेडियो !

मिथिलेश योगेंद्र

कार्यक्रम प्रमुख, आकाशवाणी, बरेली।

एक कविता रेडियो की

…………………………रेडियो दिवस तो बस बहाना है,

हमारा काम तो सबको जगाना है।

मोबाइल फोन से दूरी बनाना है,

रहना है स्वस्थ मन से भी तो रेडियो है जरूरी, ये बात सबको बताना है।

प्रकृति से कर लो थोड़ी बात, अरे इस अंधी दौड़ में कहां तक जाना है ?

तो बस सुन लो अपने मन की वाणी

ट्यून कर लो 100.4 fm

जन जन की वाणी आकाशवाणी।

लेखक: मिथिलेश योगेन्द्र

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