सपा के ‘मेलोड़ी कार्यक्रम’ में घमासान, महिला नेताओं की खींचतान खुलकर आई सामने
पैकेट विवाद से शुरू हुआ बवाल, संगठन में दो फाड़ की चर्चा तेज
रिपोर्ट सत्य प्रकाश
बरेली में समाजवादी पार्टी के महिला सभा से जुड़े “मेलोड़ी कार्यक्रम” के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला वोटरों को जोड़ना और संगठन को मजबूत करना था, लेकिन मंच के पीछे चली खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। महिला नेताओं के बीच तीखी बहस और गुटबाजी ने पार्टी की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया।
‘मेलोड़ी के पैकेट’ को लेकर मची तनातनी
सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम के दौरान एक महिला नेता पर आरोप लगा कि वे मेलोड़ी के पैकेट अपने बैग में रखकर वहां से निकल गईं। इस बात को लेकर महिला कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि मौके पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं को बीच-बचाव करना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोनों पक्षों में काफी देर तक आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे और कार्यक्रम का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
महिला नेताओं ने उठाई अलग जिम्मेदारी की मांग
विवाद के बाद कई वरिष्ठ महिला नेताओं ने संगठन के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका दिया जाए और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से बांटी जाएं। नेताओं ने यह भी संकेत दिया कि अगर समय रहते संगठनात्मक बदलाव नहीं किए गए तो इसका असर आने वाले चुनाव में देखने को मिल सकता है।
हिंदू-मुस्लिम महिला नेताओं में भी बढ़ी दूरी
कार्यक्रम के दौरान महिला सभा के भीतर सांप्रदायिक आधार पर भी खींचतान की चर्चा तेज रही। हिंदू और मुस्लिम महिला नेताओं के बीच तालमेल की कमी साफ दिखाई दी। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उपेक्षा और पक्षपात के आरोप लगाए, जिससे संगठन की एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
वरिष्ठ नेता ने संभाला मोर्चा
स्थिति बिगड़ती देख सपा महानगर के एक वरिष्ठ नेता ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने दोनों पक्षों की महिला नेताओं को अलग-अलग बुलाकर बातचीत की और संगठन की एकता बनाए रखने की अपील की। नेता ने साफ कहा कि चुनाव नजदीक हैं और ऐसे समय में आपसी विवाद पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
हाईकमान तक पहुंची रिपोर्ट, लखनऊ में हलचल
सूत्रों का दावा है कि बरेली में हुए इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट पार्टी हाईकमान तक पहुंच चुकी है। लखनऊ स्तर पर मामले की निगरानी की जा रही है और जल्द ही दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत की जा सकती है। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले पार्टी किसी भी तरह की गुटबाजी को बढ़ने नहीं देना चाहती।
महिला वोट बैंक साधने की कोशिश पर लगा झटका
जिस कार्यक्रम को महिला वोटरों को जोड़ने और संगठन को मजबूत करने के लिए आयोजित किया गया था, वही अब पार्टी की किरकिरी का कारण बन गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर समय रहते विवाद नहीं सुलझा तो इसका असर संगठन और चुनावी रणनीति दोनों पर पड़ सकता है।


