सांसद के सवाल के बाद बढ़ी इंटर्नशिप राशि, फिर भी योजना पर उठे सवाल
रिपोर्ट /सत्य प्रकाश
नई दिल्ली/लखनऊ। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत युवाओं को दी जा रही आर्थिक सहायता पहले न केवल अपर्याप्त मानी जा रही थी, बल्कि इसे लेकर संसद में सवाल उठने के बाद ही सरकार को इसमें संशोधन करना पड़ा। अब मार्च 2026 से इंटर्नशिप के लिए दी जाने वाली कुल मासिक सहायता बढ़ाकर 5000 रुपये से 9000 रुपये कर दी गई है।
सांसद नीरज मौर्य ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि करीब 5000 रुपये प्रतिमाह की सहायता के साथ महानगरों में इंटर्नशिप करना युवाओं के लिए व्यावहारिक नहीं है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों के युवाओं के अवसर सीमित हो जाते हैं, क्योंकि इतनी राशि में रहने-खाने और अन्य खर्च पूरे करना मुश्किल है।
कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने सदन में जानकारी देते हुए बताया कि मार्च 2026 से इंटर्नशिप के लिए कुल 9000 रुपये मासिक सहायता दी जाएगी। इसमें 8100 रुपये सरकार और 900 रुपये संबंधित कंपनियों की ओर से दिए जाएंगे।
हालांकि योजना के क्रियान्वयन को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 6.21 लाख आवेदन मिलने के बावजूद केवल लगभग 8700 युवाओं (डेढ़ प्रतिशत से भी कम) ने ही इंटर्नशिप जॉइन की। दूसरे चरण में भी स्थिति लगभग इसी तरह की बताई जा रही है।
अखबार से बातचीत में सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि 10,831 करोड़ रुपये के बड़े बजट के बावजूद योजना का क्रियान्वयन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। मंत्री के जवाब से यह भी सामने आया कि वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक केवल 87.46 करोड़ रुपये ही खर्च हो सके, जो कुल बजट का एक प्रतिशत भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब तक योजना को अधिक व्यावहारिक नहीं बनाया जाएगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार से नहीं जोड़ा जाएगा और युवाओं की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप इसमें बदलाव नहीं किए जाएंगे, तब तक इसका व्यापक लाभ युवाओं तक नहीं पहुंच पाएगा।


