Home Uncategorized सीबीगंज के हजारों परिवार आज भी ज़हर उगलती इस फैक्ट्री के रहम...

सीबीगंज के हजारों परिवार आज भी ज़हर उगलती इस फैक्ट्री के रहम पर जीने को मजबूर हैं।

0
{"remix_data":[],"remix_entry_point":"challenges","source_tags":[],"origin":"unknown","total_draw_time":0,"total_draw_actions":0,"layers_used":0,"brushes_used":0,"photos_added":0,"total_editor_actions":{},"tools_used":{},"is_sticker":false,"edited_since_last_sticker_save":false,"containsFTESticker":false}

सीबीगंज के हजारों परिवार आज भी ज़हर उगलती इस फैक्ट्री के रहम पर जीने को मजबूर हैं।

फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/राजेश सिंह

बरेली को स्मार्ट सिटी का तमगा मिला हुआ है, लेकिन शहर के सीबीगंज क्षेत्र में स्थित सुपीरियर इंडस्ट्री (वाइन प्लांट) की चिमनियों से निकलता ज़हरीला धुआँ और राख पूरे इलाके को नर्क बना चुका है।

बरेली को स्मार्ट सिटी का तमगा मिला हुआ है,

सुबह उठते ही घर की छतें, आँगन, दीवारें और यहाँ तक कि बिस्तर तक काली राख के ढेर से पटे रहते हैं।

महिलाएँ घंटों झाड़ू-पोंछा लगाने में जुटी रहती हैं, फिर भी कपड़े धोने से पहले ही गंदे हो जाते हैं।

साँस लेना मुश्किल, आँखें जलती हैं, बच्चों और बुजुर्गों की सेहत बिगड़ रही है

लेकिन प्रशासन और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।

स्थानीय लोगों ने दर्जनों बार लिखित और मौखिक शिकायतें की हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फोटो, वीडियो सबूत दिए गए, लेकिन हर बार जवाब एक ही जाँच कर रहे हैं।

असलियत यह है कि फैक्ट्री मालिकों के राजनीतिक और आर्थिक रसूख के आगे पूरा तंत्र घुटने टेक चुका है। नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं,

चिमनियों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण या तो लगे ही नहीं या जानबूझकर बंद रखे जाते हैं।

रात के अंधेरे में ज़हरीला धुआँ और राख आसपास के मोहल्लों पर बरसाया जाता है ताकि दिन में सबूत कम मिलें।

यह कोई छोटी-मोटी लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित पर्यावरणीय अपराध है।

वायु प्रदूषण (निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत इस तरह की इकाइयों के लिए सख्त मानक निर्धारित हैं।

चिमनी से निकलने वाली राख और धुएँ में पार्टिकुलेट मैटर, सुबह दस बजे से लेकर शाम पांच बजे तक सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य ज़हरीले तत्वों की मात्रा तय सीमा से कई गुना अधिक होना स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध है। फिर भी न कार्रवाई, न सीलिंग, न जुर्माना बस खानापूरी।

प्रश्न यह है कि क्या स्मार्ट सिटी का मतलब सिर्फ़ सड़कें चौड़ी करना और लाइटें लगाना है या वहाँ रहने वाले लोगों को साफ हवा और सुरक्षित जीवन भी देना है

जब रसूखदार उद्योगपतियों के हितों की बात आती है तो सारे कानून और सारे विभाग क्यों लाचार हो जाते हैं

सीबीगंज के हजारों परिवार आज ज़हर उगलती इस फैक्ट्री के रहम पर जीने को मजबूर हैं।

अगर अभी नहीं चेते तो आने वाले दिनों में यहाँ कैंसर, अस्थमा और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का विस्फोट देखने को मिलेगा और उसकी ज़िम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ निष्क्रिय प्रशासन और मौन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की होगी।

यह सिर्फ़ एक सुपीरियर इंडस्ट्री फैक्ट्री का मामला नहीं, बरेली की आने वाली पीढ़ियों के जीवन-मरण का सवाल है।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version