15 दिन में निपटेंगी शत्रु संपत्तियों की फाइलें, प्रशासन का सख्त अल्टीमेटम
रिपोर्ट /राजेश सिंह
बरेली।जिले में दर्ज शत्रु संपत्तियों के मामलों को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में है। कलेक्ट्रेट में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। शेष सभी प्रक्रियाएं 15 दिनों के भीतर पूरी करने का अल्टीमेटम जारी किया गया है।
जिले में कुल 220 शत्रु संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें से 177 के वेस्टिंग ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं, जबकि 135 संपत्तियों पर अमलदरामद की कार्रवाई पूर्ण हो चुकी है। 120 से अधिक मामलों में जिला मूल्यांकन समिति (डीवीसी) की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
106 संपत्तियां अभी डीवीसी के लिए शेष
रिपोर्ट के अनुसार 106 संपत्तियों को अब भी डीवीसी में भेजा जाना बाकी है। वहीं 85 मामलों में नामांतरण की प्रक्रिया लंबित है। तहसील सदर में 11 डीवीसी प्राप्त हो चुकी हैं, जबकि नगर निगम क्षेत्र की 45 डीवीसी अभी भी प्रक्रिया में अटकी हुई हैं।
बहेड़ी और महेशपुर अटरिया में विशेष निर्देश
बहेड़ी तहसील में सात वेस्टिंग ऑर्डर प्रक्रियाधीन हैं। महेशपुर अटरिया क्षेत्र में एक ही गाटा संख्या के विभाजन के कारण सात अलग-अलग डीवीसी तैयार की गई थीं। प्रशासन ने निर्देश दिया है कि सभी विभाजित हिस्सों की एकीकृत पार्ट-वार डीवीसी तैयार कर भ्रम की स्थिति समाप्त की जाए।
सार्वजनिक निर्माण बनी चुनौती
आंवला क्षेत्र में स्थिति अधिक जटिल पाई गई है। यहां 13 शत्रु संपत्तियों पर नलकूप, पुलिस थाना, स्कूल और मंदिर निर्मित होने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन ने सार्वजनिक उपयोग में आ रहे हिस्सों को अलग चिन्हित कर शेष भूमि का पुनर्मूल्यांकन कराने और निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
महेशपुर अटरिया के कुछ गाटों पर कब्रिस्तान भी स्थित है। ऐसे मामलों में लखनऊ स्थित शत्रु संपत्ति कार्यालय से मार्गदर्शन लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अदालत में लंबित वाद भी नहीं बनेंगे बाधा
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन संपत्तियों पर न्यायालय में वाद लंबित हैं, उनका जिला स्तर पर मूल्यांकन कराया जाएगा। आंवला क्षेत्र में गलत बंटवारे के एक मामले में 15 दिन के भीतर पुनर्स्थापना प्रार्थना पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
81 संपत्तियों के दस्तावेज लखनऊ रवाना
81 शत्रु संपत्तियों से जुड़े डिमांड वेस्टिंग दस्तावेज लखनऊ कार्यालय भेजे जा चुके हैं। आदेश मिलते ही नामांतरण और डीवीसी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
स्पष्ट है कि वर्षों से लंबित शत्रु संपत्तियों के मामलों पर अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। तय समयसीमा में कार्रवाई पूरी होती है या नहीं, इस पर जिलेभर की नजरें टिकी हुई हैं।
