हलाल सर्टिफिकेशन: मुख्यमंत्री योगी के बयान पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का विरोध, कही यह बात

Picture of Bhaskar News 24

Bhaskar News 24

Share करें

✓ Link copy हो गया!

हलाल सर्टिफिकेशन: मुख्यमंत्री योगी के बयान पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का विरोध, कही यह बात

फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट-हैदर अली

बरेली/ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हाल में दिए गए बयान जिसमें उन्होंने कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन से मिलने वाले पैसों का दुरुपयोग धर्मांतरण, लव जिहाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए होता है पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने असहमति जताई है।

मुख्यमंत्री के बयान के बाद यह विवादित मुद्दा फिर से सुर्खियों में आ गया।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि जिन लोगों ने हलाल सर्टिफिकेट देने का धंधा शुरू किया है, वह शरीयत की रोशनी में गलत है और मजहब की आड़ में मुनाफा कमाया जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कागज़ पर ‘हलाल’ लिख देने से किसी वस्तु को हलाल नहीं माना जा सकता इसके लिए शरीयत द्वारा निर्धारित मापदण्डों और शर्तों का पालन जरूरी है। रजवी ने कहा कि जब तक शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक किसी उत्पाद को हलाल नहीं कहा जा सकता।

मौलाना रजवी ने आगे आरोप लगाया कि कुछ संस्थाएँ हलाल सर्टिफिकेट जारी करके उनसे मोटी रकम वसूलती हैं और यह तरीका गलत है

हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री की इस बात से सहमति जताने से इनकार किया कि ये वसूले गए पैसे आतंकवाद या देशविरोधी गतिविधियों के लिए उपयोग किए जा रहे हैं अगर ऐसा कोई सबूत है तो सरकार को जांच करानी चाहिए, उन्होंने कहा।

उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में हलाल सर्टिफिकेशन पर रोक लागू होने और लोगों से हलाल सर्टिफिकेशन वाले उत्पाद न खरीदने की अपील करते हुए कहा कि इस दायरे में करोड़ों रुपये का कारोबार है और यह पैसा गलत गतिविधियों में लगता है।

उन्होंने उपभोक्ताओं से कहा कि खरीदते समय जीएसटी और अन्य पहचानपत्र देखे जाएँ और संदिग्ध रूप से प्रमाणित उत्पादों से दूरी बनाए रखें। सरकार ने इस मुद्दे पर कार्रवाई की बात भी कही है।

विश्लेषण: इस बहस के दो पक्ष सामने हैं — एक ओर धार्मिक व धार्मिक-व्यापारिक मानकों और पारदर्शिता पर उठते सवाल, और दूसरी ओर सुरक्षा व सामाजिक सरोकारों के नाम पर राजनीति व प्रशासनिक कदम।

विशेषज्ञों का कहना है कि हलाल प्रमाणन के मुद्दे में पारदर्शिता, मानकीकरण और किसी सरकारी अथवा मान्यता प्राप्त संस्थान द्वारा निरीक्षण-रजिस्ट्रेशन आवश्यक है, ताकि उपभोक्ता धोखाधड़ी से बचें और किसी तरह के गैरकानूनी वित्तीय हस्तांतरण की जांच संभव हो सके।

क्या आगे होगा?
मौजूदा बयान के बाद सरकार की ओर से और जांच-प्रक्रिया या निर्देशों की घोषणा हो सकती है; वहीं मुस्लिम समुदाय के धार्मिक संगठनों और व्यापारिक संस्थाओं की प्रतिक्रिया व उनके दिए बयान भी इस बहस को आगे प्रभावित करेंगे। मौलाना रजवी ने मांग की है कि अगर किसी प्रकार के गोरखाधंधे या देशविरोधी गतिविधियों के ठोस सबूत हों तो सरकार निरपेक्ष जांच कराए।

Bhaskar News 24
Author: Bhaskar News 24

Share करें

✓ Link copy हो गया!
सबसे ज्यादा पड़ गई