बरेली में अस्पतालों की खुली पोल: मिनी बाईपास पर बिना फायर एनओसी चल रहे दर्जनों अस्पताल,

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बरेली में अस्पतालों की खुली पोल: मिनी बाईपास पर बिना फायर एनओसी चल रहे दर्जनों अस्पताल,

फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/राजेश सिंह

बरेली। मिनी बाईपास क्षेत्र में स्थित कई निजी अस्पतालों में फायर सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही सामने आई है। अग्निशमन विभाग की हालिया जांच में खुलासा हुआ है कि अनेक अस्पताल वर्षों से बिना फायर एनओसी के ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं।

विभाग ने ऐसे सभी अस्पतालों की सूची तैयार कर ली है और अब इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

जांच में सामने आया कि जिन अस्पतालों को मरीज स्वास्थ्य सुरक्षा का भरोसा करके चुनते हैं, वहीं कई अस्पताल फायर सुरक्षा के बुनियादी मानकों का पालन तक नहीं कर रहे।

सबसे सनसनीखेज खुलासा यह हुआ कि मिनी बाईपास स्थित एक अस्पताल में वर्ष 2018 में आग लगी थी, लेकिन घटना के सात साल बाद भी अस्पताल ने फायर एनओसी लेना जरूरी नहीं समझा। अधिकारियों ने इस रवैये को सीधी ‘गंभीर लापरवाही’ करार दिया है।

अग्निशमन अधिकारी मनु शर्मा ने बताया कि मिनी बाईपास पर स्थित एक अस्पताल के निरीक्षण के दौरान कई खतरनाक अनियमितताएं मिलीं। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि अस्पताल के बेसमेंट में ही ऑपरेशन थिएटर (ओटी) संचालित किया जा रहा था।

सुरक्षा मानकों के अनुसार बेसमेंट में ओटी या कोई भी महत्वपूर्ण चिकित्सा इकाई चलाना सख्त वर्जित है, क्योंकि आपात स्थिति में वहां से मरीजों को निकालना बेहद मुश्किल होता है। यह सीधे-सीधे फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन है और मरीजों की जान को जोखिम में डालता है।

निरीक्षण के बाद अस्पताल संचालक को तुरंत नोटिस जारी किया गया, जिसके बाद अस्पताल ने फायर एनओसी के लिए आवेदन कर दिया है। उधर, स्वास्थ्य विभाग ने भी अपने स्तर पर अस्पताल की इमारत, सुरक्षा उपकरणों, इमरजेंसी एग्जिट, इलेक्ट्रिक वायरिंग और मेडिकल मानकों की गहन जांच शुरू कर दी है।

400 अस्पताल, सिर्फ 250 के पास फायर एनओसी — बाकी 150 मौत को दावत?

जिले में लगभग 400 निजी अस्पताल और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से केवल 250 के पास ही फायर एनओसी है। यानी करीब 150 अस्पताल बिना किसी सुरक्षा प्रमाणपत्र के चल रहे हैं, जो किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकते हैं।

ऐसे अस्पतालों में न तो सही फायर अलार्म सिस्टम होता है, न पानी आधारित अग्निशमन साधन। कई अस्पतालों में तो इमरजेंसी गेट तक बंद पाए गए हैं, जिससे आग लगने की स्थिति में बचाव का कोई रास्ता नहीं रह जाता। यह स्थिति न केवल गैरकानूनी है, बल्कि मरीजों की जान को सीधा खतरा है।

अग्निशमन विभाग का कहना है कि अब ऐसे अस्पतालों पर किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। जिन अस्पतालों ने अब तक एनओसी नहीं ली है या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, उन पर जल्द कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर सभी अस्पतालों की संरचनात्मक सुरक्षा और अग्निशमन व्यवस्थाओं की दोबारा जांच की जाएगी।

प्रशासन की सख्ती से अस्पताल संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। विभागीय अधिकारियों का साफ कहना है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ इस बार व्यापक कार्रवाई की जाएगी।

 

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Author: Bhaskar News 24

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