कोडीन सिरप नेटवर्क पर यूपी सरकार का ‘वज्रपात’, अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े सूत्र आए सामने
संपादक/धीरेंद्र सिंह
खबर (सूत्रों के हवाले से):कोडीन युक्त कफ सिरप से जुड़े मामले में सामने आई रिपोर्ट किसी वज्रपात से कम नहीं मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार यह मामला सिर्फ अवैध बिक्री तक सीमित नहीं, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से भी जुड़े पाए गए हैं।
सूत्र बताते हैं कि कोडीन युक्त कफ सिरप खुद में अवैध नहीं है, लेकिन 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए इसका इस्तेमाल चिकित्सकीय रूप से प्रतिबंधित है। इसी नियम का दुरुपयोग करते हुए ड्रग माफियाओं ने बड़े पैमाने पर कफ सिरप का जखीरा इकट्ठा किया और बिना प्रिस्क्रिप्शन नशे के बाजार में इसकी सप्लाई की।
जांच में खुलासा हुआ है कि सुपर स्टॉकिस्ट से लेकर रिटेलर तक ड्रग माफियाओं की एक पूरी संगठित सप्लाई चेन काम कर रही थी। इसी चेन को तोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने देश का अब तक का सबसे बड़ा क्रैकडाउन अभियान चलाया।
सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई सिर्फ कफ सिरप तक सीमित नहीं रही, बल्कि सिडेटिव और स्लीपिंग पिल्स की अवैध बिक्री पर भी एक साथ शिकंजा कसा गया। बरामद की गई कफ सिरप की दवाइयां असली पाई गईं, लेकिन पूरा खेल इनके अवैध डायवर्जन और गैरकानूनी बिक्री का था।
सूत्र यह भी स्पष्ट करते हैं कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की मौत का मामला तमिलनाडु में बनी नकली कफ सिरप से जुड़ा है। केंद्र सरकार उस नकली कफ सिरप की अलग से जांच कर रही है। तमिलनाडु की कफ सिरप का मामला यूपी में पकड़े गए कोडीन सिरप नेटवर्क से अलग है, लेकिन दोनों को जोड़कर भ्रम फैलाया जा रहा है।
फिलहाल एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन, फंडिंग और आगे की सप्लाई लाइन की गहन पड़ताल में जुटी


