वर्दी में सख्त अफसर, पर्दे पर सादगी भरी अदाकारा: सिमाला प्रसाद की प्रेरणादायक कहानी /
रिपोर्ट /राजेश सिंह
मनोरंजन की दुनिया में अक्सर सफलता को स्टारडम, चमक-दमक और बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से आंका जाता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो साबित कर देते हैं कि असली पहचान केवल पर्दे पर नहीं, बल्कि असल जिंदगी के कामों से बनती है। ऐसी ही प्रेरणादायक शख्सियत हैं सिमाला प्रसाद, जो एक तरफ पुलिस अधिकारी हैं और दूसरी ओर फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
सिमाला प्रसाद उन चुनिंदा लोगों में से हैं जिन्होंने यह दिखाया कि अगर जुनून और मेहनत हो तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC को पहले ही प्रयास में पास किया। इसके बाद वह भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुईं और मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। अपने कार्यकाल में वे अपराधियों के खिलाफ सख्त और आम जनता के प्रति संवेदनशील अधिकारी के रूप में जानी गईं।
पुलिस सेवा की व्यस्त जिम्मेदारियों के बावजूद सिमाला प्रसाद ने अभिनय की दुनिया में भी कदम रखा। वर्ष 2016 में फिल्म “अलीफ” से उन्होंने बॉलीवुड में डेब्यू किया। इस फिल्म में उनके सहज और सादगी भरे अभिनय ने दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके बाद 2019 में रिलीज हुई फिल्म “नक्काश” में उन्होंने अपनी अभिनय प्रतिभा का एक और मजबूत परिचय दिया, जिसमें उन्होंने कुमुद मिश्रा और शारिब हाशमी जैसे कलाकारों के साथ काम किया।
दिलचस्प बात यह है कि जहां फिल्मों में पुलिस की भूमिका निभाने के लिए कलाकारों को लंबी ट्रेनिंग लेनी पड़ती है, वहीं सिमाला प्रसाद असल जिंदगी में उसी वर्दी की जिम्मेदारी निभा रही हैं। यही वजह है कि जब वे कैमरे के सामने आती हैं तो उनका व्यक्तित्व अभिनय से ज्यादा वास्तविकता का एहसास कराता है।
सिमाला प्रसाद की कहानी यह संदेश देती है कि इंसान अगर ठान ले तो एक साथ कई क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकता है। वर्दी की सख्ती और कला की संवेदनशीलता को साथ लेकर चलने वाली यह शख्सियत आज युवाओं के लिए प्रेरणा का एक अनोखा उदाहरण बन चुकी है। ✨


