नवरात्रि 2026: हाथी पर सवार होकर आएंगी माता रानी, सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है यह संयोग
हल्द्वानी गौलापार मां कालीचौड़ धाम/बरेली। मां दुर्गा की आराधना के महापर्व शारदीय नवरात्रि को लेकर भक्तों में उत्साह का माहौल है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान माता रानी के आगमन और प्रस्थान के वाहन का विशेष महत्व होता है। इस बार माता रानी के हाथी पर आगमन को सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली का प्रतीक माना जा रहा है।
माता रानी के वाहन का क्या है धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार, नवरात्रि की शुरुआत सप्ताह के किस दिन होती है, उसके आधार पर माता के आगमन का वाहन निर्धारित किया जाता है। इस संबंध में एक प्रचलित श्लोक है—
शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।
गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधौ नौका प्रकीर्तिता।।
इस मान्यता के अनुसार, रविवार या सोमवार को नवरात्रि शुरू होने पर माता रानी का वाहन हाथी माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से हाथी को ऐश्वर्य, स्थिरता, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
हाथी पर माता के आगमन को माना जाता है शुभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता दुर्गा का हाथी पर आगमन अच्छी वर्षा, कृषि में उन्नति और धन-धान्य की वृद्धि का संकेत माना जाता है। इसे समाज में सुख-शांति और खुशहाली से भी जोड़कर देखा जाता है।
हालांकि, ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं। देश की अर्थव्यवस्था, मौसम और कृषि पर इनके प्रभाव को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।
कलश स्थापना के साथ शुरू होगी मां दुर्गा की आराधना
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ शक्ति की उपासना का शुभारंभ होता है। नौ दिनों तक मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
इस दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन होते हैं। भक्त व्रत रखकर मां दुर्गा से सुख, शांति, आरोग्य और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
मां दुर्गा के स्वागत की तैयारियां शुरू
शारदीय नवरात्रि को लेकर घरों और मंदिरों में तैयारियां की जाती हैं। भक्त मां दुर्गा के स्वागत के लिए पूजा स्थल सजाते हैं और विधि-विधान से पूजा की तैयारी करते हैं। आस्था और भक्ति से जुड़ा यह पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है।
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