मंच की बुलंद आवाज से जन-स्वास्थ्य और स्वरोजगार तक, बरेली के वंस चतुर्वेदी की प्रेरणादायी युवा यात्रा
बरेली। अपनी प्रखर वाणी, ओजस्वी कविता पाठ और प्रभावशाली वक्तव्य शैली के जरिए देश-प्रदेश में पहचान बनाने वाले बरेली के युवा वंस चतुर्वेदी आज युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। राष्ट्रीय वक्ता, कवि और मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में उन्होंने विभिन्न मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रभाव छोड़ा है। भाषण, आशुभाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर उन्होंने बरेली का नाम रोशन किया है।
11 जून 1997 को जन्मे वंस चतुर्वेदी बरेली के सुभाषनगर क्षेत्र के निवासी हैं। उनके पिता विजय कुमार चतुर्वेदी और माता राधा चतुर्वेदी हैं। बचपन से ही मेधावी रहे वंस ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई जयनारायण सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज से पूरी की। उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों में टॉपर रहकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
इसके बाद वंस ने बरेली कॉलेज से विज्ञान वर्ग में बीएससी (B.Sc.) की डिग्री हासिल की। शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए उन्होंने प्रथम श्रेणी में एलएलबी (LLB) उत्तीर्ण की और पंजीकृत अधिवक्ता के रूप में भी अपनी पहचान बनाई।
मंच संचालन, वक्तृत्व और कविता के क्षेत्र में उनकी सक्रियता ने उन्हें युवाओं के बीच अलग पहचान दिलाई। अपनी प्रभावशाली संवाद शैली के माध्यम से वे सामाजिक जागरूकता, सकारात्मक सोच और युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का संदेश देते हैं।
वंस चतुर्वेदी की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा, निरंतर मेहनत और सीखने की ललक के साथ युवा शिक्षा, वक्तृत्व और सामाजिक सरोकारों के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकते हैं।





