FIR का आदेश देने वाले CJM का तबादला, न्यायिक स्वतंत्रता पर उठे सवाल
रिपोर्ट/राजेश सिंह
प्रयागराज/संभल।
संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल मामले में पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर का अचानक तबादला कर दिया गया है। इस फैसले के बाद न्यायिक व्यवस्था और पुलिस तंत्र के बीच शक्ति संतुलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि 24 नवंबर 2024 को संभल में हुए बवाल के मामले में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाल अनुज तोमर सहित कुल 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश CJM विभांशु सुधीर ने दिया था। इसी आदेश के कुछ समय बाद उनका तबादला कर दिया गया।
न्यायिक आदेश के बाद अब CJM विभांशु सुधीर को सुल्तानपुर में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद पर भेजा गया है। वहीं चंदौसी कोर्ट में तैनात सीनियर डिवीजन सिविल जज आदित्य सिंह को संभल का नया CJM नियुक्त किया गया है।
इस तबादले को लेकर कानूनी और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग इसे न्यायिक स्वतंत्रता पर दबाव के रूप में देख रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे यह संदेश गया है कि पुलिस पर कार्रवाई करने वाले न्यायिक अधिकारियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
अब यह सवाल आम चर्चा में है—
जज बड़ा या पुलिस?
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था के रिश्तों पर नई बहस छेड़ दी है।


