Tuesday, April 28, 2026
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IIT दिल्ली की रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा: फोन का GPS 87% सटीकता से करता है

IIT दिल्ली की रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा: फोन का GPS 87% सटीकता से करता है

फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/हैदर अली

आपकी गतिविधियों की ट्रैकिंग, विशेषज्ञों ने दी सावधानी बरतने की सलाह

नई दिल्ली। आधुनिक तकनीक ने जहां इंसान की ज़िंदगी को आसान बनाया है, वहीं उसकी निजता (Privacy) पर खतरा भी बढ़ा दिया है।

IIT दिल्ली के शोधकर्ताओं की एक नई रिसर्च ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है। अध्ययन में पाया गया है कि स्मार्टफोन का GPS (Global Positioning System) आपकी रोजमर्रा की गतिविधियों को 87 प्रतिशत तक सटीकता के साथ ट्रैक कर सकता है।

यानी अगर आपके फोन की लोकेशन ऑन है, तो आपका हर कदम तकनीकी निगरानी के दायरे में आ जाता है।

रिसर्च में क्या निकला सामने

IIT दिल्ली की कंप्यूटर साइंस विभाग की टीम ने यह अध्ययन देशभर के अलग-अलग स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं पर आधारित डेटा के विश्लेषण से किया। रिसर्च में सामने आया कि ज्यादातर मोबाइल ऐप्स, जो लोकेशन एक्सेस की अनुमति मांगते हैं, वे केवल दिशा बताने के लिए नहीं बल्कि यूजर की गतिविधियों और रूटीन पैटर्न को ट्रैक करने के लिए भी GPS डेटा का इस्तेमाल करते हैं।

टीम ने बताया कि GPS लोकेशन डेटा के ज़रिए यह तक पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति कब घर से निकलता है, कब ऑफिस पहुंचता है, किन जगहों पर बार-बार जाता है और वहां कितनी देर रुकता है। इस जानकारी का इस्तेमाल विज्ञापन कंपनियां, मार्केटिंग एजेंसियां और कुछ ऐप डेवलपर प्लेटफॉर्म अपने फायदे के लिए करते हैं।

निजी जानकारी बन रही है खतरे में

रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, फोन की लोकेशन ऑन करते ही डिवाइस आपकी निजी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने लगता है, जिनमें यात्रा का समय, गंतव्य, ठहरने की जगह और यहां तक कि आपकी रुचियां भी शामिल हो सकती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह डेटा अक्सर “बैकग्राउंड ऐप्स” के जरिए बिना यूजर की जानकारी के थर्ड पार्टी सर्वर पर भेजा जाता है। कई बार यह जानकारी विज्ञापनों को टारगेट करने के लिए उपयोग की जाती है, लेकिन साइबर अपराधी भी इन डेटा लीक का फायदा उठा सकते हैं।

विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण सलाह

IIT दिल्ली की इस स्टडी में शामिल साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों ने कहा कि लोगों को अपनी डिजिटल प्राइवेसी को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि:

लोकेशन सर्विसेज़ केवल उसी समय ऑन करें जब वास्तव में जरूरत हो, जैसे नेविगेशन या कैब बुकिंग के दौरान।

फोन की सेटिंग्स में जाकर बैकग्राउंड में लोकेशन एक्सेस कर रही ऐप्स को सीमित करें।

समय-समय पर ऐप्स की अनुमति (Permissions) की जांच करें और जिनकी जरूरत नहीं है, उन्हें डिसेबल करें।

एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर “Approximate Location” फीचर का इस्तेमाल करें ताकि फोन आपकी सटीक स्थिति की जानकारी साझा न करे।

सरकार और यूजर्स दोनों को जागरूक रहने की जरूरत

साइबर विशेषज्ञों ने कहा कि इस रिसर्च से स्पष्ट है कि डिजिटल सुरक्षा केवल टेक्नोलॉजी कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यूजर्स को भी सतर्क रहना होगा। सरकार को भी डेटा प्रोटेक्शन कानूनों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है ताकि यूजर्स की निजता सुरक्षित रह सके।

आपको बता दे, IIT दिल्ली की यह रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण चेतावनी के रूप में देखी जा रही है—जहां सुविधा के साथ सुरक्षा का संतुलन बनाना अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

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