झूठी FIR और कथित साजिश: पारिवारिक विवाद को तूल देकर खानदान-ए-आला हज़रत को बदनाम करने का आरोप
यूपी हेड – फिरोज खान
रिपोर्ट – राजेश सिंह
बरेली। एसएसपी कार्यालय के बाहर गुरुवार को एक युवक द्वारा जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश किए जाने की घटना से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मामला शांत भी नहीं हुआ था कि शुक्रवार को घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। युवक के पिता मुकद्दर एसएसपी कार्यालय पहुंचे और अपने ही बेटे व बहू पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रार्थनापत्र सौंपा।
इसी प्रकरण में युवक की बेटी की तहरीर पर थाना इज्जतनगर पुलिस ने मौलाना तौकीर रज़ा खां, मन्नान रज़ा खां उर्फ मन्नानी मियां के दामाद मोहसिन रज़ा खां सहित कुल 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। एफआईआर दर्ज होते ही मामला राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया।
रविवार को मोहसिन रज़ा खां ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि उनका इस विवाद से कोई संबंध नहीं है और उन्हें जानबूझकर फंसाया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह रही कि स्वयं युवक के पिता मुकद्दर ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि इस पूरे मामले में मोहसिन रज़ा खां की कोई भूमिका नहीं है और यह उनका पारिवारिक विवाद है।
प्रेस बयान में आरोप लगाया गया कि इस प्रकरण को जबरन तूल देकर खानदान-ए-आला हज़रत और मसलक-ए-आला हज़रत की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। दावा किया गया कि हर छोटे विवाद को 26 सितंबर 2025 की एक घटना से जोड़कर मौलाना तौकीर रज़ा खां का नाम घसीटा जा रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल उठाए गए। आरोप है कि सिविल न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद बरेली विकास प्राधिकरण द्वारा बुलडोजर कार्रवाई की कोशिश की गई। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट के 31 मई 2025 के आदेश के अनुपालन में आंशिक भुगतान के बावजूद बिजली विभाग द्वारा रिकवरी की धमकियां दिए जाने का आरोप भी लगाया गया।
प्रेस बयान में एक कथित गिरोह और एक अधिवक्ता पर झूठे मुकदमों के जरिए वसूली और बदनामी के आरोप लगाए गए हैं। अंत में दोहराया गया कि यह पूरा मामला शाकिर बेग के परिवार का आंतरिक विवाद है, जिसका खानदान-ए-आला हज़रत से कोई लेना-देना नहीं है और इसे बदनाम करने की साजिश बताया गया।
