दादा की विरासत संभालने को बेताब हैं भुजेन्द्र गंगवार,
डिजिटल हेड /शम्स आलम
2027 में भाजपा से लड़ेंगे विधानसभा चुनाव
नवाबगंज विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में एक नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिल रहा है। इसका केंद्र हैं पूर्व मंत्री और छह बार के विधायक रहे स्वर्गीय चेतराम गंगवार के पोते भुजेन्द्र गंगवार। भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय सदस्य भुजेन्द्र अब अपने दादा की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वे आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से टिकट की दावेदारी पेश करेंगे।
भुजेन्द्र गंगवार के दादा, स्वर्गीय चेतराम गंगवार, उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक प्रभावशाली नेता रहे हैं। उन्होंने नवाबगंज से लगातार छह बार विधायक के रूप में जनता की सेवा की और तीन बार प्रदेश सरकार में मंत्री पद संभाला। वे पूर्व मुख्यमंत्रियों एन.डी. तिवारी और वीर बहादुर सिंह की सरकारों में कैबिनेट मंत्री रहे। उनकी सशक्त राजनीतिक छवि और जनसेवा की पहचान ने उन्हें नवाबगंज क्षेत्र का ‘जनप्रिय नेता’ बनाया। अब उनके पोते भुजेन्द्र उसी जनसेवा की परंपरा को आगे ले जाने की तैयारी में हैं।
भुजेन्द्र गंगवार लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों में अग्रणी रहते हैं। संगठन में अपनी सक्रियता के साथ-साथ वे बाल श्रम सलाहकार बोर्ड और रेलवे बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण सरकारी निकायों के सदस्य रह चुके हैं। संगठनात्मक जिम्मेदारियों के साथ भुजेन्द्र ने हमेशा जमीनी स्तर पर जनता से जुड़ाव बनाए रखा है।
जनसेवा और संगठन से जुड़ी प्रतिबद्धता
भुजेन्द्र गंगवार का कहना है, “मैं अपने दादा जी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए नवाबगंज में लगातार काम कर रहा हूं। 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी से टिकट की दावेदारी करूंगा। मुझे पूरा भरोसा है कि भाजपा मेरे कार्य और समर्पण को देखकर मुझे मौका देगी और जनता का आशीर्वाद मुझे विधान सभा तक पहुंचाएगा।”
उनका कहना है कि उन्होंने अपने दादा की नीति और सिद्धांतों को हमेशा अपने जीवन में उतारा है। जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को सुनना और समाधान की दिशा में प्रयास करना ही उनका मूल लक्ष्य है।
नवाबगंज में बढ़ रही लोकप्रियता
नवाबगंज विधानसभा क्षेत्र में भुजेन्द्र गंगवार की सक्रियता लगातार बढ़ी है। चाहे स्थानीय समस्याओं का समाधान हो, सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी या भाजपा की नीतियों का प्रचार—हर मोर्चे पर उनकी मौजूदगी दर्ज की जा रही है। यही कारण है कि क्षेत्रीय राजनीति में उन्हें अब एक संभावित मजबूत उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है।
भविष्य की दिशा
भुजेन्द्र गंगवार की सक्रियता और उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि यह संकेत देती है कि नवाबगंज की राजनीति आने वाले समय में एक नई दिशा ले सकती है। जनता में उनकी पकड़ और संगठन में उनकी पहचान उन्हें भाजपा के अंदर एक सशक्त दावेदार बनाती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर पार्टी ने उन्हें मौका दिया, तो वे न केवल अपने दादा की विरासत को आगे बढ़ाएंगे, बल्कि नवाबगंज के विकास की नई कहानी भी लिख सकते हैं।
भुजेन्द्र गंगवार की यह प्रतिबद्धता और ऊर्जा इस बात का संकेत है कि नवाबगंज की राजनीति में अब एक नई पीढ़ी अपनी भूमिका निभाने को तैयार है जो परंपरा और परिवर्तन, दोनों का संगम लेकर आगे बढ़ रही है।
