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पीएम आवास योजना में तकनीकी खामियों से गरीब वंचित, जरी-जरदोजी कारीगरों के लिए विशेष केंद्र का भी नहीं प्रस्ताव — सांसद नीरज मौर्य के सवाल से खुलासा

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पीएम आवास योजना में तकनीकी खामियों से गरीब वंचित, जरी-जरदोजी कारीगरों के लिए विशेष केंद्र का भी नहीं प्रस्ताव — सांसद नीरज मौर्य के सवाल से खुलासा

रिपोर्ट/सत्य प्रकाश 

बरेली/नई दिल्ली।आंवला से सांसद Neeraj Maurya द्वारा संसद में उठाए गए सवालों के जवाब में केंद्र सरकार की ओर से दो महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। एक ओर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में चयन प्रक्रिया की तकनीकी खामियों के कारण हजारों पात्र गरीब परिवार योजना के लाभ से वंचित होने की बात सामने आई है, वहीं दूसरी ओर बरेली और बदायूं के पारंपरिक जरी-जरदोजी कारीगरों के लिए किसी विशेष कौशल केंद्र की स्थापना का फिलहाल कोई प्रस्ताव भी सरकार के पास नहीं है।

सांसद नीरज मौर्य ने सरकार से पूछा था कि बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर जिलों में बड़ी संख्या में गरीब पात्र परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित क्यों रह गए हैं। उन्होंने खास तौर पर रामगंगा नदी के किनारे रहने वाले भूमिहीन और बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए किसी अलग प्रावधान की जानकारी भी मांगी थी। साथ ही पिछले तीन वर्षों में इन जिलों में स्वीकृत और पूर्ण हुए मकानों का विवरण तथा लाभार्थियों से अवैध वसूली की शिकायतों की जांच के लिए केंद्रीय टीम भेजने की संभावना के बारे में भी सवाल किया था।

सरकार की ओर से दिए गए उत्तर में बताया गया कि इन जिलों में बड़ी संख्या में मकान स्वीकृत और पूर्ण किए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार बरेली में 9,201 मकान स्वीकृत हुए, जिनमें से 9,127 पूरे हो चुके हैं। बदायूं में 27,230 में से 27,086 और शाहजहांपुर में 31,160 में से 30,476 मकानों का निर्माण पूरा किया जा चुका है।

हालांकि सांसद नीरज मौर्य का कहना है कि उनके प्रश्न का मुख्य पहलू यह था कि जिन पात्र परिवारों का नाम वर्ष 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के आधार पर तैयार सूची में शामिल ही नहीं हो पाया, उनके लिए सरकार के पास क्या वैकल्पिक व्यवस्था है। मंत्री के उत्तर में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ऐसे छूटे हुए परिवारों को तत्काल राहत देने के लिए क्या विशेष कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि तकनीकी कारणों से गरीब परिवार आवास जैसी मूलभूत योजना से वंचित रह जाते हैं तो यह व्यवस्था की गंभीर कमी को दर्शाता है।

इसी तरह सांसद ने बरेली और बदायूं के पारंपरिक जरी-जरदोजी तथा बेंत-बांस शिल्प से जुड़े कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, विपणन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए विशेष कौशल केंद्र स्थापित करने की योजना के बारे में भी सवाल उठाया था।

कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री Jayant Chaudhary ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि फिलहाल ऐसे किसी विशेष कौशल केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन नहीं है। हालांकि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच बरेली जिले में पारंपरिक हस्त कढ़ाई से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 621 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है।

सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि सरकार को चाहिए कि आवास योजना में छूटे हुए पात्र परिवारों की पहचान के लिए दोबारा सर्वेक्षण कराया जाए और पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक बाजार से जोड़ने के लिए विशेष कौशल केंद्र स्थापित किए जाएं, ताकि क्षेत्र के गरीब परिवारों और युवाओं को वास्तविक लाभ मिल सके।

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