पूर्व विधायक के पौत्रों से दोस्ती निभाई! देवरनिया पुलिस ने जानलेवा हमले की धारा हटाकर कर दिया खेल
फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो /राजेश सिंह
पीड़ित बोला दबंगों से मिली पुलिस, हाईकोर्ट में मान ली थी जानलेवा धारा, अब कोर्ट में बदल दी रिपोर्ट
बरेली। पूर्व विधायक के पौत्रों पर दर्ज जानलेवा हमले के मामले में देवरनिया पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुरू से जिस मुकदमे में पुलिस ने हाईकोर्ट तक यह माना था कि हमला जानलेवा था, उसी केस में अब स्थानीय कोर्ट में पुलिस ने तीन धाराएं घटाकर हलफनामा दाखिल कर दिया। आरोप है कि थानेदार और विवेचक ने “सेटिंग” करके दबंग आरोपियों को राहत दिलाने के लिए यह पूरा खेल रचा है।
देवरनिया के कठर्रा निवासी व्यापारी प्रीतम सिंह ने एसएसपी से शिकायत करते हुए बताया कि 19 अगस्त की सुबह जब वह अपने मेडिकल स्टोर की सफाई कर रहे थे, तभी पूर्व विधायक के पौत्र शशांक वर्मा और मयंक वर्मा अपने तीन साथियों के साथ उनके पड़ोसी राजीव कुमार की दुकान में आग लगा रहे थे। उन्होंने वीडियो बनाकर राजीव को सूचना दी तो आरोपियों ने चाकू से हमला, फायरिंग और दुकान में तोड़फोड़ की।
हमले में प्रीतम सिंह का एक कान हमेशा के लिए सुनने की क्षमता खो बैठा। बताया कि आरोपी पहले भी उनसे 50 हजार रुपये की रंगदारी वसूल चुके थे। रुपये न देने पर उन्होंने यह हमला किया। उस समय पुलिस ने प्रीतम और राजीव दोनों की शिकायतों पर अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए थे।
हाईकोर्ट में मानी गई थीं गंभीर धाराएं
विवेचक ने पहले धारा 109, 111(2) और 118 लगाई थी। जब आरोपियों ने हाईकोर्ट और जिला जज के समक्ष राहत की याचिका दायर की तो पुलिस ने साफ कहा था कि मामला गंभीर है और हमला जानलेवा था। मगर जब हाल में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, तो वही धाराएं हटा दी गईं।
प्रीतम सिंह का आरोप है कि यह बदलाव दबाव और राजनीतिक सेटिंग के तहत किया गया। उन्होंने कहा— “एक ही विवेचक और थानेदार शुरू से केस में हैं। जब हाईकोर्ट में वही धाराएं सही मानी गईं, तो अब हटाने का क्या मतलब?”
सपा नेता से जुड़े हैं आरोपी, व्यापारी ने जताया खतरा
पीड़ित ने आरोप लगाया कि शशांक और मयंक वर्मा सपा के एक जनप्रतिनिधि के करीबी हैं और दबंग प्रवृत्ति के हैं। उनके दादा पूर्व में बहेड़ी से विधायक रहे हैं। इसी राजनीतिक पहुंच के दम पर पुलिस ने पूरे केस को कमजोर किया है।
प्रीतम ने एसएसपी से विवेचना किसी अन्य थाने को देने और विवेचक व थानेदार की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आरोपियों से उन्हें और उनके परिवार को जान का खतरा है।
एसएसपी अनुराग आर्य ने मामले पर कहा “देवरनिया पुलिस पर लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी। किसी व्यापारी या आम नागरिक को डरने की जरूरत नहीं है।”
पूर्व विधायक के पौत्रों पर कार्रवाई के बजाय धारा हटाने से पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल उठ गया है। व्यापारी वर्ग इसे “दबंग-पुलिस गठजोड़” का खुला उदाहरण बता रहा है।


