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बजट 2026-27: दवाइयों–EV से राहत, शराब–लग्जरी सामान पर मार, जानिए क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा

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बजट 2026-27: दवाइयों–EV से राहत, शराब–लग्जरी सामान पर मार, जानिए क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा

संपादक/धीरेंद्र सिंह (धीरू) 

नई दिल्ली।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। इस बजट में कस्टम्स ड्यूटी, एक्साइज और अप्रत्यक्ष करों में किए गए बदलावों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। सरकार ने मेक इन इंडिया, ग्रीन एनर्जी, स्वास्थ्य और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं को सस्ता किया है, वहीं लग्जरी और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों को महंगा कर दिया गया है।

क्या सस्ता हुआ (कीमतें घटने की संभावना):

दवाइयां: डायबिटीज, कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की जीवनरक्षक दवाइयों पर कस्टम्स ड्यूटी में छूट, इलाज होगा सुलभ।

खेल का सामान: खेलो इंडिया मिशन को बढ़ावा, स्पोर्ट्स इक्विपमेंट सस्ते होने की उम्मीद।

इलेक्ट्रिक वाहन (EV): लिथियम-आयन बैटरी और कच्चे माल पर ड्यूटी घटने से इलेक्ट्रिक स्कूटर और कारें सस्ती हो सकती हैं।

मोबाइल फोन व इलेक्ट्रॉनिक्स: कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले, PCBA जैसे कंपोनेंट्स पर ड्यूटी कम, स्मार्टफोन और टैबलेट होंगे सस्ते।

सोलर पैनल व रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण: ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा, सोलर सिस्टम सस्ते होंगे।

घरेलू उपकरण: माइक्रोवेव ओवन के पार्ट्स पर ड्यूटी छूट से कीमतों में गिरावट संभव।

चमड़ा व फुटवियर: घरेलू उत्पादन और निर्यात को समर्थन, अप्रत्यक्ष रूप से कीमतों पर राहत।

स्वास्थ्य बीमा: सेक्शन 80D के दायरे में विस्तार से प्रीमियम पर कुछ राहत।

क्या महंगा हुआ (कीमतें बढ़ने की संभावना):

शराब और तंबाकू उत्पाद: शराब, सिगरेट, पान मसाला, गुटखा पर एक्साइज ड्यूटी और हेल्थ सेस बढ़ा, जेब पर सीधा असर।

लग्जरी आयातित सामान: हाई-एंड घड़ियां, डिजाइनर कपड़े, जूते, लग्जरी कारें और ज्वेलरी महंगी हो सकती हैं।

सिन गुड्स और प्रोसेस्ड फूड: कुछ उत्पादों पर बढ़े टैक्स से महंगाई की आशंका।

इनकम टैक्स पर क्या?

बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, जिससे सैलरीड क्लास को सीधी राहत नहीं मिली।

कुल मिलाकर

बजट 2026-27 में सरकार ने साफ संकेत दिया है कि स्वास्थ्य, ग्रीन एनर्जी और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन, जबकि लग्जरी और हानिकारक वस्तुओं पर सख्ती जारी रहेगी। हालांकि इन बदलावों का वास्तविक असर बाजार और सप्लाई चेन के अनुसार आने वाले हफ्तों में दिखाई देगा।

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