बरेली के सेटेलाइट बस स्टैंड पर खुला नाला बना ‘मौत का जाल’, 30 घंटे बाद मिला युवक का शव; सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
रिपोर्ट /सत्य प्रकाश
बरेली। शहर के व्यस्त सेटेलाइट बस स्टैंड पर प्रशासनिक लापरवाही की एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। खुले नाले में गिरने से हरदोई निवासी 30 वर्षीय युवक तौहीद की मौत हो गई। करीब 30 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गुरुवार तड़के उसका शव नाले से बरामद किया गया। इस घटना ने नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र का रहने वाला तौहीद मंगलवार रात करीब 9:30 बजे बस पकड़ने के लिए सेटेलाइट बस स्टैंड पहुंचा था। इसी दौरान भीड़भाड़ के बीच उसका पैर फिसल गया और वह पास में खुले पड़े नाले में जा गिरा। नाले में तेज बहाव और गंदगी होने के कारण कुछ ही पलों में वह नजरों से ओझल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, नगर निगम और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। युवक को तलाशने के लिए तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। बाद में NDRF और SDRF की टीमें भी अभियान में शामिल हो गईं। पूरी रात जेसीबी मशीनों से नाले में जमा कचरा हटाया गया और आसपास के स्लैब तोड़े गए, लेकिन युवक का कोई पता नहीं चल सका।
करीब 30 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गुरुवार सुबह करीब 3 बजे नाले से युवक का शव बरामद हुआ। शव की पहचान उसकी जेब से मिले आधार कार्ड के जरिए तौहीद के रूप में हुई। पुलिस ने घटना की सूचना उसके परिजनों को दे दी है।
बताया जा रहा है कि जिस नाले में युवक गिरा, उसका स्लैब करीब एक साल पहले टूट गया था और तब से वह खुला पड़ा था। परिवहन विभाग ने इस संबंध में नगर निगम को कई बार पत्र भी लिखा, लेकिन नाले को ढकने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। जबकि इसी रास्ते से प्रतिदिन करीब 50 हजार यात्री और सैकड़ों बसें गुजरती हैं।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नाले को ढक दिया जाता तो एक युवक की जान बच सकती थी। फिलहाल प्रशासन इस घटना को हादसा बता रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इतनी बड़ी लापरवाही के लिए किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई होगी या नहीं।
