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बरेली में शिक्षा माफिया का खेल! छात्र के भविष्य से खिलवाड़, पिता ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार

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बरेली में शिक्षा माफिया का खेल! छात्र के भविष्य से खिलवाड़, पिता ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार

फिरोज खान/यूपी हेड
रिपोर्ट/सत्यप्रकाश

बरेली। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल अब पैसों के मंदिर बनते जा रहे हैं। ताज़ा मामला बरेली के वेदी इंटरनेशनल स्कूल, पीलीभीत बाईपास रोड का है, जहां एक छात्र के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ किया गया जिसने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है।

आजाद नगर कॉलोनी कटरा चांद खां निवासी सौरभ गुप्ता ने जिला अधिकारी बरेली को शिकायती पत्र भेजकर स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता का कहना है कि उनके पुत्र देव गुप्ता ने वर्ष 2025-26 में इंटरमीडिएट की परीक्षा दी थी, जिसमें वह कम्पार्टमेंट में था। उसने पुनः परीक्षा दी लेकिन दुर्भाग्यवश फेल हो गया।

लेकिन जब सौरभ गुप्ता अपने बेटे का एडमिशन किसी अन्य विद्यालय में करवाने गए तो यू-डायस (U-DISE) पोर्टल पर बच्चे का परिणाम पास दिखा रहा था। सरकारी पोर्टल और सीबीएसई बोर्ड की मार्कशीट में इस अंतर से पूरा परिवार हैरान रह गया। परिणामों में गड़बड़ी के चलते छात्र का कहीं भी एडमिशन नहीं हो पाया और उसका पूरा वर्ष बर्बाद हो गया।

पिता सौरभ गुप्ता का कहना है कि जब उन्होंने स्कूल प्रबंधन से इस संबंध में बात की तो प्रबंधक अमनदीप वेदी और प्रधानाचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हम कुछ नहीं कर सकते, आपने पहले नहीं बताया।”

आरोप है कि जब सौरभ गुप्ता ने विरोध किया तो प्रबंधक अमनदीप वेदी ने धमकी भरे लहजे में कहा “जहाँ शिकायत करनी है कर लो, मेरे स्कूल का कुछ नहीं बिगड़ेगा।”

सौरभ गुप्ता ने बताया कि उनका दूसरा बेटा वेद गुप्ता, जो इसी स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ रहा है, उसका भी रिकॉर्ड यू-डायस पोर्टल पर नहीं मिल रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन और संचालक द्वारा गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। यह न केवल उनके बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े करता है।

सौरभ गुप्ता ने डीएम से मांग की है कि स्कूल प्रबंधन पर कठोर कार्रवाई की जाए ताकि ऐसे शिक्षा माफियाओं के खिलाफ उदाहरण पेश किया जा सके और अन्य बच्चों के भविष्य की रक्षा हो सके।

पिता सौरभ गुप्ता का कहना है

“हमारा परिवार तनाव में है, बच्चा मानसिक रूप से टूट चुका है। यह सिर्फ मेरा नहीं, हर उस माता-पिता का दर्द है जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए इन तथाकथित बड़े स्कूलों पर भरोसा करते हैं।”

अब सवाल यह है कि जब सरकारी पोर्टल और बोर्ड के रिकॉर्ड में इतना बड़ा अंतर है तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है?
क्या बरेली प्रशासन अब इन शिक्षा माफियाओं पर शिकंजा कसेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा रह जाएगा?

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