बरेली में 3,171 वक्फ संपत्तियों का डेटा लटका!
पोर्टल पर चढ़ सकीं सिर्फ 236—मुतवल्ली गायब, कागज़ात नदारद
फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/राजेश सिंह
बरेली जिले में वक्फ संपत्तियों का ब्योरा डिजिटल करने की प्रक्रिया छह जून से चल रही है, लेकिन सिस्टम की धीमी रफ्तार और अभिलेखों की भारी कमी के कारण काम बुरी तरह अटक गया है।
जिले की 3,171 वक्फ संपत्तियों में से केवल 236 का विवरण ही ‘उम्मीद पोर्टल’ पर अपलोड हो पाया है, जबकि पांच दिसंबर तक सभी संपत्तियों का डेटा ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य है।
सुन्नी वक्फ बोर्ड—3,102 संपत्तियां, चढ़ी सिर्फ 218
जिले में सुन्नी वक्फ बोर्ड की 3,102 संपत्तियां दर्ज हैं, लेकिन पोर्टल पर केवल 218 की एंट्री हो सकी है।
जिला कोऑर्डिनेटर नोमान अहमद के अनुसार
ज्यादातर संपत्तियों के मुतवल्ली ही नहीं हैं
1987 के गजट में दर्ज कई मुतवल्ली अब जीवित भी नहीं
कई जगहों पर मुतवल्ली मौखिक रूप से घोषित, कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं
वक्फ कमेटियां बहुत कम, इसलिए जमीनी सत्यापन मुश्किल
शिया वक्फ बोर्ड—69 संपत्तियां, ब्योरा अपलोड सिर्फ 18
शिया वक्फ बोर्ड की 69 संपत्तियों में से पोर्टल पर मात्र 18 का विवरण दर्ज हुआ है।
जिला कोऑर्डिनेटर जमीर रज़ा का कहना है
कई संपत्तियों पर लोग निवास कर रहे हैं और उसे वक्फ मानने को तैयार नहीं
बोर्ड ने 65 संपत्तियों की सूची भेजी, लेकिन इनमें अधिकांश के आवश्यक अभिलेख ही नहीं मिले
कई संपत्तियों के मुतवल्ली का कोई रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं
कागज़ात गुम, मुतवल्ली नदारद सबसे बड़ी रुकावट
डेटा अपलोड के लिए वक्फनामा, चौहद्दी, नक्शा, खसरा-खतौनी जैसे दस्तावेज अनिवार्य हैं, लेकिन ज्यादातर के पास ये मौजूद ही नहीं।
सहायक सर्वे कमिश्नर (वक्फ) लालमन के अनुसार—
“कई संपत्तियों के खसरा-खतौनी और नक्शे तक गायब हैं।”
“बोर्ड ने अनेक संपत्तियों के मुतवल्ली की जानकारी ही नहीं भेजी।”
“समय सीमा पर एंट्री न होने की स्थिति में क्या कार्रवाई होगी, यह केंद्र सरकार तय करेगी।”
2,935 संपत्तियों का भविष्य अधर में
पोर्टल पर अपलोड न हो पाने वाली संपत्तियों की संख्या 2,935 है।
अगर प्रक्रिया इसी रफ्तार से चलती रही, तो तय समय में यह काम पूरा होना लगभग असंभव दिख रहा है।
बड़ा सवाल जिन संपत्तियों पर लोग रह रहे हैं, उनका सत्यापन कौन करेगा?
जिनकी खतौनी, नक्शा, वक्फनामा ही गुम हैं—क्या वे संपत्तियां पोर्टल पर चढ़ भी पाएंगी?
मुतवल्ली न होने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?
वक्फ सिस्टम की जमीनी हकीकत उजागर
बरेली में वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण अभियान साफ दिखा रहा है कि ज़मीनी स्तर पर
रिकॉर्ड बिखरे पड़े हैं, मुतवल्ली गायब हैं,और दस्तावेजीकरण का हाल बेहद कमजोर है।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि 5 दिसंबर तक जिले की हजारों वक्फ संपत्तियां पोर्टल पर दर्ज हो भी पाएंगी या नहीं।


