यूपी की सबसे बड़ी टैक्स चोरी खुली मास्टरमाइंड अभी भी बाहर,
फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/शारुख हुसैन
एसआईटी पर सुस्त रवैया पर उठे सवाल
मुरादाबाद। राज्य कर विभाग ने दो मोबाइल नंबरों के सहारे 122—144 तक फैले फर्जी फर्मों के नेटवर्क का खुलासा कर देश का एक बड़ा जीएसटी घोटाला उजागर किया है, लेकिन जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) अब तक कथित मास्टरमाइंड तक नहीं पहुँच पाया। विभाग का दावा है कि इस शृंखला से लगभग ₹400 करोड़ से अधिक का जीएसटी फरार हुआ और कुल काल्पनिक टर्नओवर एक हजार करोड़ों के पार दिखाई गया।
31 अक्तूबर को सिविल लाइंस थाना में दर्ज दो मुकदमों में नौ व्यक्ति और दो फर्मों का नामकरण किया गया था, जबकि एसएसपी के आदेश पर 1 नवंबर को एसआईटी गठित की गई। राज्य कर अधिकारियों ने पुलिस को डिजिटल साक्ष्य, फर्मों की क्राइम-कुंडली व ट्रांसपोर्ट संबंधित दस्तावेज सौंपे बावजूद इसके गिरफ्तारियाँ नहीं हुईं और कोई ठोस छापेमारी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। पुलिस ने अभी तक आरोपियों को कानूनी रूप से भगोड़ा घोषित करने के लिए भी कोई याचिका दाखिल नहीं की।
जांच में पाया गया है कि नेटवर्क का केंद्र लखनऊ के एक कारोबारी के नाम से जुड़ा है। आरोप है कि सिर्फ दो मोबाइल नंबरों के आधार पर दर्जनों फर्जी कंपनियों का पंजीकरण कराया गया और उनके नाम पर कागजी बिल बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम कर लिया गया। लोहे और स्क्रैप के कारोबार को छिपा कर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया कई राज्यों में कागजी कारोबार दिखाकर अरबों का काल्पनिक टर्नओवर दर्ज कराया गया।
मरियादा विभाग ने ट्रक चालकों के बयानों, सीडीआर रेकॉर्ड और अन्य डिजिटल फुटप्रिंट एसआईटी को दे दिए हैं, पर कार्रवाई धीमी और सतर्कता कम नज़र आ रही है। स्थानीय लोगों व व्यापारियों का कहना है कि अगर पुलिस सच में इन फर्मों के पते पर ठोस रेड कर दे तो कई और नाम खुल सकते हैं; वरना यह रैकेट किसी और नाम से फिर सक्रिय हो जाएगा।
यह मामला जीएसटी व्यवस्था में इनपुट टैक्स क्रेडिट के दुरुपयोग की गंभीरता को फिर से रेखांकित करता है जहां कागजी बिलों और नकली पैन/आधार के सहारे बड़े पैमाने पर कर का नुकसान किया जा रहा है। विशेषज्ञों की राय है कि केवल पकड़े गए फर्मों को बंद करना पर्याप्त नहीं; नियमन, डेटा-आधारित सतर्कता और तेज़ पुलिस-कर समन्वय ही ऐसे नेटवर्क को जड़ से मिटा सकता है।
