सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: इलाहाबाद हाईकोर्ट में 5 सेवानिवृत्त जज होंगे एडहॉक न्यायाधीश
भास्कर न्यूज24/न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। देश की न्याय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक अहम फैसला लिया है। संविधान के अनुच्छेद 224A के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एडहॉक जज के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है। ये नियुक्तियां दो वर्ष की अवधि के लिए होंगी।
यह कदम हाईकोर्ट में लंबित मामलों, विशेष रूप से आपराधिक मामलों के शीघ्र निस्तारण को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि मामलों की बढ़ती संख्या के कारण नियमित न्यायाधीशों पर अत्यधिक कार्यभार है, जिसे कम करने में एडहॉक जज अहम भूमिका निभा सकते हैं।
एडहॉक जज के रूप में जिन नामों को मंजूरी मिली
न्यायमूर्ति मोहम्मद फ़ैज़ आलम ख़ान
न्यायमूर्ति मोहम्मद असलम
न्यायमूर्ति सैयद आफ़ताब हुसैन रिज़वी
न्यायमूर्ति रेनू अग्रवाल
न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा
इन सभी न्यायाधीशों को उनके अनुभव और कार्यकुशलता के आधार पर चुना गया है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया को गति दी जा सके।
कम इस्तेमाल होने वाला संवैधानिक प्रावधान
गौरतलब है कि अनुच्छेद 224A का प्रयोग अब तक बहुत कम किया गया है। वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रावधान के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे, ताकि जरूरत पड़ने पर सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की सेवाएं ली जा सकें।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न्यायिक सुधारों की दिशा में एक मजबूत कदम है और इससे हाईकोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे में उल्लेखनीय तेजी आएगी।
