सुप्रीम कोर्ट सख्त: आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर देशभर से जवाब तलब,
फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/हैदर अली
सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 27 अक्टूबर को तलब किया
नई दिल्ली। देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और उनसे जुड़े हमलों की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
अदालत ने इस गंभीर समस्या को लेकर पूरे देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का दायरा राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाते हुए सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को आगामी 27 अक्टूबर 2025 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
यह आदेश 22 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ — जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया द्वारा दिया गया।
यह वही बेंच है जो अब 27 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड की गई कॉज लिस्ट में इस सुनवाई का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
बढ़ती घटनाओं पर चिंता
देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाओं में पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। कई राज्यों में मासूम बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर हमले की भयावह घटनाएं सामने आई हैं। कई मामलों में लोगों की जान तक चली गई। ऐसे में आम जनता के साथ-साथ नगर निकायों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं कि आखिर यह समस्या काबू में क्यों नहीं आ रही है।
सुप्रीम कोर्ट का व्यापक हस्तक्षेप
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को केवल एक राज्य या शहर तक सीमित न रखते हुए पूरे देश के संदर्भ में सुनवाई करने का फैसला किया है। अदालत ने कहा कि यह समस्या राष्ट्रीय महत्व की है और सभी राज्यों को इस पर एक समान नीति बनानी होगी। कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी यह जानकारी मांगी है कि अब तक इस दिशा में क्या कदम उठाए गए हैं और क्या कोई एकीकृत नीति तैयार की जा रही है।
राज्यों से मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से यह भी पूछा है कि आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण, और पुनर्वास के लिए क्या ठोस उपाय किए जा रहे हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि अब तक हुए खर्च का हिसाब और उसके प्रभाव का आकलन क्या है। कोर्ट ने कहा कि यदि राज्यों ने प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो यह न केवल मानव जीवन के लिए खतरा बनेगा बल्कि पशु क्रूरता अधिनियम के प्रावधानों का भी उल्लंघन होगा।
अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव 27 अक्टूबर 2025 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताएं कि उनके राज्य में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि यदि राज्यों ने इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
जनता की उम्मीदें
देशभर में लोग सुप्रीम कोर्ट के इस कदम को एक बड़ी राहत के रूप में देख रहे हैं। आम जनता का मानना है कि यदि अदालत इस पर सख्ती से निगरानी रखेगी, तो शायद नगर निगमों और स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदारी निभाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप न केवल नागरिक सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि यह पशु कल्याण और सार्वजनिक व्यवस्था दोनों को संतुलित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। अदालत की आगामी सुनवाई से यह तय होगा कि देश में आवारा कुत्तों की समस्या पर अब ठोस नीति बनेगी या नहीं।


