43 साल से ‘अछूते’ मौलाना पर योगी का हंटर: भाजपा नेता से नज़दीकियां भी नहीं बचा सकीं तौकीर रजा को,
फिरोज खान भास्कर टुडे
रिपोर्ट-राजेश सिंह
जेल–बुलडोज़र–सीलिंग से हिला डाला पूरा बरेली शहर
उत्तर प्रदेश के बरेली से निकलने वाली यह कहानी अब पूरे प्रदेश की सियासत का चेहरा बदल रही है।
43 साल से सक्रिय मौलाना तौकीर रजा खान, जो कभी खुद को सत्ता के करीबी बताते नहीं थकते थे, आज योगी सरकार के सबसे बड़े एक्शन के निशाने पर हैं।
20 मुकदमे, 4 दंगे, और 43 साल की राजनीतिक ढाल लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि कानून ने वाकई उन्हें पकड़ लिया है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता से करीबी रिश्ते रखने वाले इस मौलाना की 200 करोड़ की संपत्तियों पर सील लगी, अवैध निर्माणों पर बुलडोज़र चला, और खुद तौकीर रजा समेत 84 लोगों को जेल भेजा गया।
“आई लव मोहम्मद” से भड़का बरेली, 72 घंटे में तौकीर रजा पर शिकंजा
26 सितंबर को बरेली शहर के इस्लामिया ग्राउंड में “I Love Mohammad” बैनर को लेकर बड़ा बवाल हुआ।
जुमे की नमाज़ के बाद अचानक भीड़ उग्र हो उठी, नारेबाज़ी, पथराव और हिंसा का दौर शुरू हो गया।
शहर की शांति भंग हुई, कई थानों की पुलिस बल को मोर्चा संभालना पड़ा।
यही से पुलिस की जांच की सुई मौलाना तौकीर रजा की ओर मुड़ी।
उनके भड़काऊ भाषण और संगठन की सक्रियता को आधार बनाते हुए पुलिस ने उन्हें मुख्य साजिशकर्ता माना।
योगी का सख्त संदेश: “वो मौलाना भूल गया कि शासन किसका है”
बरेली हिंसा के अगले ही दिन 27 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में उच्चस्तरीय बैठक में इस पर खुलकर कहा
“वो मौलाना भूल गया कि अब शासन किसका है। कानून तोड़ने वालों को जेल से बाहर नहीं रहना चाहिए।”
बस, इसके बाद जैसे पूरा प्रशासन एक्शन मोड में आ गया।
28 सितंबर की सुबह से “ऑपरेशन तौकीर रजा” शुरू हो गया।
28 सितंबर से शुरू हुआ ‘ऑपरेशन तौकीर रजा’
पुलिस, एसटीएफ और प्रशासनिक टीमों ने मौलाना तौकीर रजा और उनके करीबियों के ठिकानों पर लगातार छापेमारी की।
48 घंटे के भीतर ही 84 लोगों की गिरफ्तारी हुई, जिनमें तौकीर रजा, उनके सात करीबी और संगठन इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख पदाधिकारी शामिल थे।
इसके साथ ही उनके संगठनों की गतिविधियों की फाइलें खंगाली गईं।
प्रशासन ने यह भी पाया कि कई संपत्तियां सरकारी ज़मीन पर कब्जा कर बनाई गई थीं और कई पर बैंक बकाया था।
200 करोड़ की संपत्ति पर बुलडोज़र और सील
बरेली जिला प्रशासन ने तौकीर रजा और उनके सहयोगियों की करीब 200 करोड़ रुपये की संपत्तियों की जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी।
रिपोर्ट में सामने आया कि कई इमारतें, मदरसे और प्रतिष्ठान बिना नक्शा स्वीकृति के बने हैं, और कई भूमि सरकारी रकबे पर हैं।
इसके बाद प्रशासन ने कई भवनों को सील कर दिया, जबकि कुछ अवैध निर्माणों पर बुलडोज़र चलाया गया।
यह कार्रवाई अब तक जारी है और पुलिस ने अवैध फंडिंग और जमीनों के दस्तावेज़ भी जब्त किए हैं।
भाजपा नेता से रिश्ते भी नहीं बचा पाए
दिलचस्प बात यह है कि मौलाना तौकीर रजा का नाम लंबे समय से एक वरिष्ठ भाजपा नेता से नज़दीकियों को लेकर चर्चा में रहा है।
स्थानीय राजनीति में यह कहा जाता रहा कि तौकीर रजा कई बार सत्ता के गलियारों में अपनी पकड़ बनाकर बच निकलते रहे।
कभी कांग्रेस के मंच पर, कभी सपा के साथ और कभी सत्ताधारी दल के नेताओं के संपर्क में रहकर उन्होंने खुद को “सुरक्षित दायरे” में रखा।
लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं।
योगी सरकार ने साफ किया है कि अब ‘कनेक्शन’ नहीं, सिर्फ कानून चलेगा।
20 मुकदमे लेकिन पहले किसी ने नहीं की कार्रवाई
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मौलाना तौकीर रजा पर 20 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें चार दंगों से जुड़े हैं।
अन्य मुकदमों में भड़काऊ भाषण, धार्मिक उन्माद फैलाना, प्रशासनिक आदेश की अवहेलना और भीड़ भड़काने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
इसके बावजूद किसी भी मुकदमे में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।
लेकिन इस बार बरेली प्रशासन ने इन पुराने मामलों को भी दोबारा खोल लिया है और नए सिरे से चार्जशीट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है।
बैंक ने भी लगाया कर्ज़ वसूली नोटिस
बरेली के साथ-साथ बदायूं जिला सहकारी बैंक ने भी मौलाना तौकीर रजा के घर पर 5,055 रुपये के बकाये का नोटिस चस्पा किया।
बैंक ने कहा कि वर्षों से यह राशि बकाया थी और अब इसे वसूला जाएगा।
प्रशासन ने बैंक की कार्रवाई में भी सहयोग देने की बात कही है।
पुलिस का बयान: “अब कोई अछूता नहीं”
बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बोल रखा है “कानून सबके लिए समान है। चाहे मौलाना हो या आम नागरिक, हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होगी।”
अधिकारियों के अनुसार, अब तक सर्विलांस और फुटेज से 100 से अधिक आरोपियों की पहचान हो चुकी है और अगले चरण में गैरजमानती वारंट जारी किए जा रहे हैं।
43 साल की ‘ढाल’ टूटी, योगी सरकार ने रचा नया रिकॉर्ड
मौलाना तौकीर रजा का मामला सिर्फ एक व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं है यह सिस्टम के “अछूत” समझे जाने वाले चेहरों के खिलाफ कानून की जीत का प्रतीक बन गया है।
चार दशक से किसी न किसी सत्ता के करीब रहकर खुद को बचाने वाले इस मौलाना पर अब कानूनी शिकंजा कस चुका है।
26 सितंबर को “आई लव मोहम्मद” के नाम पर भड़के बरेली के बवाल ने मौलाना की सियासी जमीन हिला दी है।
योगी सरकार का संदेश साफ है “दंगा भड़काने वाला चाहे मौलाना हो या नेता, अब बख्शा नहीं जाएगा।”


