Sunday, April 19, 2026
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लहरा उठा परचम-ए-नियाज़िया : 197वां उर्स शरीफ़ शुरू, जायरीन से गुलज़ार हुआ जामा बाड़ा

लहरा उठा परचम-ए-नियाज़िया : 197वां उर्स शरीफ़ शुरू, जायरीन से गुलज़ार हुआ जामा बाड़ा

फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/राजेश सिंह

बरेली। ख़्वाजा कुतुब स्थित खानकाह-ए-आलिया नियाज़िया में आज परचम-ए-नियाज़िया लहराने के साथ ही हज़रत कुतुब-ए-आलम, मदार-ए-आज़म शाह नियाज़ वे नियाज़ अहमद क़ादरी चिश्ती निज़ामी (20 अ०) का 197वां वार्षिक उर्स शुरू हो गया। दस रोज़ा यह उर्स 22 नवंबर 2025 से 2 दिसंबर 2025 तक अपनी रूहानी रौनक बिखेरता रहेगा।

उर्स का आग़ाज़ सज्जादा नशीन सरकार हज़रत मेंहदी मियां नियाज़ी साहब किब्ला मद्दाजिल्लाहुल आली ने परचम कुशाई की रसम अदा करके किया। इसके साथ ही उन्होंने उर्स कार्यक्रमों की औपचारिक घोषणा भी की।

कदीमी रिवायतों के साथ दस रोज़ा उर्स की शुरुआत

खानकाह-ए-आलिया नियाज़िया के बानिए-रूहानी हज़रत शाह नियाज़ (20 अ०), जो गौस-ए-आज़म व ख़्वाजा गरीब नवाज़ के रूहानी उत्तरा अधिकारी माने जाते हैं, के उर्स की तमाम तकरीबात इस बार भी पूरे शानो-शौकत और परंपरा के साथ मुनअकिद की जा रही हैं।

उर्स के दौरान लंगर लगातार जारी रहेगा। हर सुबह नमाज़-ए-फ़जर के बाद कुरानख्वानी की महफ़िल सजेगी, जबकि रात को नमाज़-ए-इशा के बाद महफ़िल-ए-समा (कव्वाली) होगी। देश भर के नामचीन कव्वाल हज़रत अपने सुफियाना कलाम पेश करेंगे। इसके बाद जायरीन चादरपोशी और गुलपोशी की अदायगी करेंगे।

देश-विदेश से उमड़ रहे हैं जायरीन

उर्स में शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने और विदेशों से भी बड़ी संख्या में जायरीन खानकाह पहुंच रहे हैं। इस बार भीड़ को देखते हुए खानकाह परिसर में ही रहने, खाने-पीने और अन्य सहूलियतों का मुकम्मल इंतज़ाम किया गया है।

परचम-ए-नियाज़िया का जुलूस—नोमेले की दरगाह से खानकाह तक

परचम का जुलूस नोमेले की दरगाह से दुआएं और सलाम के साथ रवाना हुआ। अंजुमन-ए-साबिरिया चिश्तिया कमेटी की ओर से आयोजित जुलूस का नेतृत्व खानकाह के प्रबंधक जुनैदी मियां नियाज़ी ने किया।

जुलूस कोतवाली इस्लामिया होते हुए खानकाह पहुंचा। इसमें सहाबज़दगान असकारी मियां नियाज़ी, दरगाह ख़ादिम नासिर मियां, वसीम साबरी, कमाल साबरी, वकि अहमद, शाहिद साबरी, शमसाद, सलीम साबरी, जाबिर साबरी, हनीफ़ साबरी, सांकेत सुधांशु शर्मा, आरिफ़ हुसैन, हाज़ी तारिक, शुशील यादव सहित पुराने शहर की कई अंजुमनें भी शरीक हुईं।

खानकाह पहुंचने पर सरकार हज़रत मेंहदी मियां नियाज़ी साहब किब्ला ने सहाबज़दगान और मुरिदीन के साथ जुलूस का गरमजोशी से इस्तकबाल किया। इसके बाद परचम कुशाई की रसम अदा की गई।

प्रबंधक का बयान

प्रबंधक जुनैदी मियां नियाज़ी ने बताया कि इस बार जायरीन की बड़ी तादाद को देखते हुए खानकाह परिसर में ही रहने और तमाम इंतज़ामात को बेहतर बनाया गया है ताकि हर आने वाला मेहमान शांति और रूहानियत के साथ उर्स की बरकतें हासिल कर सके।

 

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