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क्यों मनाया जाता है भाई दूज — जानिए पूरी कथा

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क्यों मनाया जाता है भाई दूज — जानिए पूरी कथा

✍ लेखक: धीरेंद्र सिंह (धीरू)

भाई दूज, जिसे भाई टीका या भाऊ बीज भी कहा जाता है, भाई-बहन के स्नेह और आत्मीय रिश्ते का प्रतीक त्योहार है। यह दीपावली के दो दिन बाद, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सफलता की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों को उपहार देकर उनके प्रति स्नेह और सुरक्षा का वचन देते हैं।

भारत के अलग-अलग हिस्सों में इस त्योहार के नाम भिन्न हैं — महाराष्ट्र में इसे भाऊ बीज, और बंगाल में भाई फोंटा कहा जाता है।

🌼 भाई दूज की पौराणिक कथा: यमराज और यमुना

भाई दूज से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा यमराज और यमुना की है।

मान्यता के अनुसार, सूर्य देव और उनकी पत्नी संज्ञा के दो संतानें थीं — पुत्र यमराज और पुत्री यमुना। सूर्य की तेज़ गर्मी सहन न कर पाने के कारण संज्ञा अपनी छाया (छाया देवी) को सूर्य की सेवा में छोड़कर तपस्या के लिए चली गईं। छाया देवी से शनि और ताप्ति का जन्म हुआ।

लेकिन छाया देवी का व्यवहार यमराज और यमुना के प्रति सौतेला था। इससे दुखी होकर यमराज यमपुरी चले गए और यमुना भी मायके से दूर चली गईं।

कई वर्षों बाद यमराज को अपनी बहन की याद आई। उन्होंने दूतों को भेजकर यमुना का पता करवाया। जब उन्हें मालूम हुआ कि यमुना विश्राम घाट (मथुरा) के पास रहती हैं, तो वे स्वयं उनसे मिलने वहाँ पहुंचे।

भाई को अपने द्वार पर देखकर यमुना अत्यंत प्रसन्न हुईं। उन्होंने स्नान कराया, आरती उतारी, तिलक लगाया और स्वादिष्ट व्यंजनों से उनका सत्कार किया। यमराज बहन के स्नेह और आदर से बहुत प्रसन्न हुए और बोले —
“बहन, जो भी वर मांगना हो, मांगो।”

यमुना ने कहा —
“भैया! प्रतिवर्ष इसी दिन आप मेरे घर आएं, ताकि मुझे आपका स्वागत करने का सौभाग्य मिलता रहे। साथ ही यह आशीर्वाद दें कि जो बहन इस दिन अपने भाई का तिलक कर आदर करेगी, और जो भाई अपनी बहन के घर भोजन करेगा, उसे कभी यमराज का भय न हो।”

यमराज ने मुस्कुराकर “तथास्तु” कहा और अपने लोक लौट गए।
तभी से यह दिन यम द्वितीया या भाई दूज के रूप में मनाया जाने लगा।

🌸 त्योहार का संदेश

भाई दूज केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और परिवारिक एकता का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि भाई-बहन का रिश्ता केवल जन्म से नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा होता है।

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