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कल्चरल कार्निवल की शाम रही बेहतरीन नाटकों नाम 

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कल्चरल कार्निवल की शाम रही बेहतरीन नाटकों नाम

रिपोर्ट/सत्य प्रकाश 

बरेली, ऑल इंडिया कल्चरल एसोसिएशन द्वारा एवं जिला प्रशासन व नगर निगम के सहयोग से आयोजित कल्चरल कार्निवल की शाम रही बेहतरीन नाटकों के नाम। संस्था अध्यक्ष राजीव शर्मा टीटू, संयोजक अंकुर किशोर सक्सेना एवं संस्था की टीम के सार्थक प्रयासों से दिव्य और भव्य कल्चरल कार्निवल का आयोजन हुआ।

इसमें शाम को चार नाटकों की शानदार प्रस्तुति हुई। इसमें पहली प्रस्तुति शून्य थिएटर दिल्ली की डॉ. रमा यादव द्वारा लिखित एवं डॉ. रमा यादव और मयंक द्वारा निर्देशित नाटक “कस्तूरबा के गांधी” रही। नाटक गांधी के चरित्र के विभिन्न पहलुओं को कस्तूरबा के दृष्टिकोण से उजागर करता है।

बा और गांधी के बीच के भावनात्मक संवाद कस्तूरबा के चरित्र और उनके स्वैच्छिक समर्पण को प्रकट करते हैं। नाटक ऐतिहासिक घटनाओं को भारत के स्वतंत्रता संग्राम और गांधी के विचारों के साथ बारीकी से जुड़ता है जो कि कस्तूरबा की दृष्टि से देखे जाते हैं। नाटक एक राजनीतिक विमर्श के दृष्टिकोण से लिखा गया है न कि नारीवादी दृष्टिकोण से। नाटक में गांधी की भूमिका में सन्नी कबीर और कस्तूरबा की भूमिका हर्ष सतीश शर्मा ने बेहतरीन तरीके से निभाई।

प्रकाश संयोजन अतुल मिश्रा का रहा। दूसरी प्रस्तुति भव्य कल्चरल सोसाइटी की शिकारी रही। नाटक का लेखन एंटन चेखोव ने और निर्देशन संजय अमन पोपली ने किया है।

मुख्य कलाकार अर्चना घई, राजीव त्यागी, संजय पोपली, डॉ. मोहन एवं जीत ने निभाई। प्रकाश सनी और पार्श्व संगीत सूर्यांश का रहा। ये एक हास्य नाटक है जो कि मानवीय संबंधों पर आधारित है। दूसरों की बीबीयों को पटाने में माहिर पीटर सुमानिच अपने दोस्त निकोलिच की बीबी एलिना के लिए क्या क्या यत्न करता है ये इसमें दर्शाया गया है। तीसरी प्रस्तुति देहरादून की धनंजय कुकरेती द्वारा निर्देशित माला का वर रही। नाटक ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

चौथी प्रस्तुति भव्य कल्चरल सोसाइटी की सुरेन्द्र सागर द्वारा लिखित एवं निर्देशित पतझड़ के बाद रही। जिसमें अर्चना घई और सुरेन्द्र सागर ने अपने सशक्त अभिनय से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसमें प्रकाश संयोजन सनी कुमार, मंच व्यवस्था देव जारवाल, रूसज्जा साक्षी राजपूत ने करी थी।

नाटक के कथासार के अनुसार हर इंसान की जिंदगी में कभी न कभी पतझड़ का मौसम जरूर आता है। ये पतझड़ नहीं बल्कि रिश्तों की पतझड़ होती है। जिस तरह पेड़ से सूखे पत्ते टूट कर बिखर जाते हैं और फिर नए पत्ते आते हैं फिर वो पेड़ हरा भरा जाता है। ठीक इसी तरह इंसान के भी रिश्ते टूटकर बिखरने के बाद फिर नए रिश्ते बनते हैं इन्हीं तानों बानो पर आधारित है।

कार्यक्रम का सफल संचालन उन्नति शर्मा, सुनील धवन एवं कमल श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर डॉ. सैयद सिराज अली, देवेन्द्र रावत, प्रदीप मिश्रा, रवि सक्सेना, मेराज, दिलशाद, शमशाद, हसीन, नूरेन, प्रमोद उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।

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